वन्यजीव अपराध पर ऐसे कागजात तैयार करें जिससे अपराधी को कोर्ट में सजा मिले

बीकानेर, 16 मार्च (उदयपुर किरण). बीकानेर में संभाग स्तरीय वन्यजीव अपराध नियंत्रण कार्यशाला का आयोजन वेटरनरी विश्वविद्यालय सभागार में किया गया. उप वन संरक्षक वन्यजीव जयदीप सिंह राठौड़ ने शनिवार को बताया कि संभागीय मुख्य वन संरक्षक महेंद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि इलाकों में निरंतर गश्त कर अधिकारी, कर्मचारी वन्य जीवों के शिकार की घटनाओं पर अंकुश लगाया जाए. अभियोजन अधिकारी चतुर्भुज शर्मा ने बताया कि वन्यजीव अपराध घटित होने पर किस तरीके से प्रकरण से सम्बन्धित कागजात तैयार किए जावे जिससे अपराधी को कोर्ट में सजा मिल सके.

डा. अनिल कटारिया ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 लागू होने के बाद अभयारण्य व राष्ट्रीय उद्यानों के विकास पर प्रकाश डाला. डा. तरुणा भाटी ने पालतू जीव व वन्यजीवों में अंतर एवं वन्यजीव अनिधियम की जानकारी दी. कर्नल डा. अशोक सिंह राठौड़ ने वन्यजीवों के रेस्क्यू एवं प्राथमिक उपचार के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि प्राथमिक उपचार से वन्यजीवों को बचाने में बहुत मदद मिलती है. उप वन संरक्षक राठौड़ ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं को अपराध होने पर किस प्रकार लागू किया जावे की विस्तृत चर्चा की एवं कार्यशाला में मौजूद सहभागियों से अपने-अपने क्षेत्र में जागरुक रहने को कहा एवं शिकार की घटना होने पर त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया.

जीव रक्षा अध्यक्ष मोखराम धारणिया ने शिकारी प्रवृत्ति के लोगों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने का आग्रह किया व प्रत्येक रेंज के कर्मचारियों को तत्परता से कार्यवाही करने का अनुरोध किया. जिससे मुल्जिम गिरफ्त से बच न पाये. सहायक वन संरक्षक राजीव गुप्ता ने अपने क्षेत्र में शिकार होने पर उसे नजर अंदाज न कर उस पर तुरंत कार्यवही करने, सेवानिवृत्त रेंजर घनश्याम सिंह नरुका ने अपराध की केस डायरी को तरीके से बनाने के बारे में तथा पृथ्वीराज रेंजर ने श्रीगंगानगर क्षेत्र की शिकार की घटना होने पर कार्रवाई करने की रोचक जानकारी दी.


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