लेमरू क्षेत्र मे चार वर्ष बाद भी पात्र लोगों को नहीं मिले प्रधानमंत्री आवास

कोरबा .राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवाओं को पीएम आवास योजना का लाभ मिलना था लेकिन बिचौलियों की वज़ह से आवास का सपना अधर में लटक गया. लेकिन जब पात्र हितग्राही का आवास सपना अधूरा रह जाए तो क्या हो.

बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन कर रहे पहाड़ी कोरवा को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में हितग्राहियों की सूची में शामिल हुआ. घने सघन जंगलों के बीच बसा ये गांव भूड़ूमाटी, जहां बिचौलियों ने भोले भाले लोगों को अपने झांसे में लेकर हितग्राहियों की रकम को बंदरबांट कर दिया. आधा अधूरा निर्माण हुआ ग्रामीण आवास पूरा होने का इंतजार कर रहे है. ये मामला लेमरु ग्राम पंचायत में आने वाला भूड़ूमाटी गांव का है. यहां के पात्र हितग्राहियों फूलमतिया और सांझीबाई का आवास कऱीब चार सालों से अधरमें लटका हुआ हैं. हालांकि फर्जी जीओटेक कर आवास की रकम को बिचौलियों ने डकार लिया. प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में इस क़दर गोल माल किया गया कि जंगलों में रहने वाले पहाड़ी कोरवा आज भी प्लास्टिक और लकड़ी से छत बना कर अपना गुजर बसर कर रहे हैं. इस मामले में चल रहे कमीशन खेल को खुद सरपंच ने स्वीकार किया.

उन्होंने बताया कि सात सौ छियालिस आवास में महज़ अभी सौ घर ही पूरा हुआ है. बाकी सभी आधे-अधूरे पड़े है. जिसकी सूचना शिकायत आला अधिकारियों को पहुंचा दी गई है. लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. केन्द्र सरकार हर ग्रामीण को पक्का मकान देने की कवायद कर रही है. लेकिन अधिकारी की उदासीनता और बिचौलियों के कारगुज़ारी की वज़ह से राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवाओं का आवास का सपना-सपना रह गया. वनांचल क्षेत्र में बसे भोले भाले ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं कहने को इन्हें राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहा जाता है. लेकिन सुविधाओं के नाम पर हाथ खाली है.

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