लाखों अकीदमंदों ने की जुम्मे की नमाज अदा

लाखों अकीदमंदों ने की जुम्मे की नमाज अदा

अजमेर, 15 मार्च (उदयपुर किरण). ख्वाजा मोईनुददीन हसन चिश्ती के 807वें उर्स के छोटे कुल की रस्म के बाद में शुक्रवार को लाखों अकीदमंदों ने जुम्मे की नमाज अदा की और देश में अमन चैन व खुशहाली की दुआ की. शहर काजी तौसिफ अहमद सिद्दीक ने नमाज अदा कराई. नमाज के चलते सुबह से ही जायरीन ने दरगाह, दरगाह बाजार, अंदरकोट, नया बाजार, देहली गेट, स्टेशन रोड आदि इलाकों में अपनी जगह बनानी शुरू कर दी. नमाज के चलते सुरक्षा व्यवस्था के ठोस कदम उठाए गए और कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए. दरगाह बाजार व आसपास के बाजारों में वाहनों का प्रवेश बंदरखा गया, ताकि नमाजियों को कोई परेशानी नहीं हो. कायड विश्राम स्थली में भी जायरीन ने नमाज अदा की.

दरगाह कमेटी ने जुम्मे की नमाज के लिए विशेष व्यवस्थाएं की. जुम्मे की नमाज अदा करने के साथ ही जायरीन का लौटने का सिलसिला भी तेज हो गया. जायरीन छठी के बाद जुम्मे की नमााज अदा करने के लिए ठहरे हुए थे. उर्स के बड़ा कुल की रस्म 17 मार्च को होगी. दरगाह क्षेत्र में उर्स की रौनक बनी हुई है. दरगाह जायरीन से खचाखच भरा रहा. देश विदेश के जायरीन ख्वाजा की दरगाह पहुंच कर चादरें पेश रहे हैं. रोडवेज बस स्टैण्ड व रेलवे स्टेशन पर भी जायरीन की भीड़ उमड़ रही है.

केन्द्रीय मंत्री गडकरी की चादर पेश: ख्वाजा गरीब नवाज के चल रहे उर्स में शुक्रवार को केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी की चादर पेश कर देश में अमन चैन व भाइचारे की दुआ की गई. नागपुर भाजपा के महासचिव असलम खान के नेतृत्व में कार्यकर्ता चादर व संदेश लेकर आए. सैयद अफसान चिश्ती ने उनको जियारत कराई और दस्तारबंदी की.

जन्नती दरवाजा बंद— देर रात कुल के छींटे के साथ दरगाह को गुलाब जल से धोया गया और गरीब नवाज की महाना छठी मनाई गई. ये रस्म पूरी कर एक रजब से जायरीन के लिए खोला गया जन्नती दरवाजा बंद कर दिया गया खादिम समुदाय ने ख्वाजा साहब की मजार पर गुलाब के फूल पेश कर एक दूसरे की दस्तारबंदी की वहीं दरगाह दीवान ने मौरूसी अमला और जलाली फकीरों के सरदारों की दस्तारबंदी की.

दरगाह दीवान की सदारत में हुए महफिल— रात दरगाह के महफिल खाने में दरगाह दीवान जैनुल आबेदीन की सिदारत में सूफियाना कव्वाली की आखिरी महफिल हुई, तभी जायरीन ने आस्ताने की दीवारों को गुलाब जल से धोना शुरू कर दिया था, लेकिन गुरुवार सुबह औपचारिक तौर पर धुलाई की रस्म अदा की गई. जायरीन महिलाएं बालों से दरगाह की जमीन की धुलाई करती दिखी वहीं अधिकांश जायरीन आस्ताने की दीवारों से रूमाल में गुलाब जल लेकर बोतलों में भरते देखे गए.

सुबह हुई रंग महफिल— सुबह करीब 11 बजे दरगाह के महफिल खाने में दीवान आबेदीन की सिदारत में रंग की महफिल हुई,जिसमें दरगाह के शाही कव्वाल असरार हुसैन ने अमीर खुसरो के इस कलाम ’मन कुन्ता मौला’ से की. इसके बाद ’मोहे अपने रंग में रंग ले रंगीले’ पढा गया. अदब की महफिल में यह कलाम ’बरसता रंग है ख्वाजा मोई के आंगन में’ भी पेश किया गया. दोपहर करीब पौने एक बजे ’आज रंग है मां रंग है’ के साथ कुल की रस्म अदा की गई. दरगाह के नक्कारखाने से शादियाने बजाए गए और बडे पीर की पहाडी से तोप दागकर उर्स का समापन किया गया.


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