मेवाड़ी धरा पर उतरा लक्ष्मी संग नारायण का बेवाण

लल्लनटॉप@ उदयपुर
करीब 2 बजे का माहौल है. हम किसी छाया के सहारे खड़े है. गला सुख रहा है और नजरे लगातार बड़ा भाणुजा की तरफ टिकी है. हम भी लगातार भगवान लक्ष्मी नारायन के आने का इंताजर कर रह है. जैसे ही ढोल नगाड़े की गूंज के साथ एक धर्म धज्जा लहरा रही है. इसी के साथ उत्साह बढ़ता है और लोग सचेत हो जाते है. धीरे धीरे बेवाण आगे बढ़ता है और फिर ठीक पौने चार बजे एक वाटिका के सामने पहुँच जाता है बेवाण. जयकारे और भजन ये दो चीजें भगवान की भक्ति की इस लहर में झूमने को मजबूर करती है. यहाँ भगवान चारभुजानाथ का बड़ा भाणुजा के भगवान लक्ष्मी नारायण से होता है आत्मीय मिलन. भक्त भाव-विभोर है और मन में आस्था की हिलोरे झोले मार रही है. आरती के बाद शोभायात्रा रवाना हुई और फिर शौर्य के कण कण में रम गए ठाकुरजी के दीवाने. इस पल को देखने वाली पीढ़ी के लिए ये सौभाग्य है. 400 साल बाद इस धरा पर भगवान का आत्मीय मिलन हुआ. बड़ा गजब का नजारा देखने को मिला.

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