भाजपा से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे अशोक त्रिपाठी

बांदा. भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर पार्टी से बगावत कर अशोक त्रिपाठी ‘जीतू’ सोमवार को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर आए. उन्होंने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल किया. आज ही भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार आरके सिंह पटेल ने भी नामांकन पत्र का दूसरा सेट दाखिल किया.

नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद मीडिया से बातचीत में अशोक त्रिपाठी ने कहा कि मैं पार्टी के जिला अध्यक्ष सहित कई पदों पर रहा हूं. इसी साल अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष पद से भी निवृत्त हुआ हूं.

भाजपा से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है. टिकट के मजबूत दावेदारों की अनदेखी की जा रही है. अटैची संस्कृति चल रही है. मैं पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मान में चुनाव मैदान में आ गया हूं.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं फिलहाल अभी भाजपा में हूं. आज नामांकन के बाद गाज गिर सकती है. यह भी कहा कि मुझे मनाने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने बातचीत की है, लेकिन कोई ठोस आधार नजर नहीं आया, जिससे मैं चुनाव मैदान में आ गया.

उन्होंने कहा कि मैं राजनीतिक दलों की तरह एक निर्दलीय प्रत्याशी होने के नाते 18 अप्रैल को शक्ति प्रदर्शन कर नामांकन पत्र का दूसरा सेट दाखिल करूंगा.

अशोक त्रिपाठी ‘जीतू’ 1971 में जनसंघ से चुने गए सांसद राम रतन शर्मा के पुत्र हैं. चुनाव मैदान में कोई ब्राह्मण उम्मीदवार न होने से ब्राह्मण वर्ग खासा नाराज था. अब अगर जीतू चुनाव मैदान में टिके रहे तो भाजपा उम्मीदवार आरके सिंह पटेल की मुसीबत बढ़ सकती है.

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