भाजपा कार्यालय की बिल्डिंग को अवैध घोषित करने के लिए पेश अंतरिम अस्थाई निषेधाज्ञा के मामले में सुनवाई के दौरान नया मोड़

उदयपुर. भाजपा कार्यालय की बिल्डिंग को अवैध घोषित करने के लिए पेश अंतरिम अस्थाई निषेधाज्ञा के मामले में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान नया मोड़ आ गया. भाजपा शहर जिलाध्यक्ष एवं कार्यालय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र पेश कर पहले भवन के मूल्यांकन पर निर्णय करने के बाद उसके आगे की सुनवाई की जाए. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को रखी है.

उल्लेखनीय है कि कांगे्रस के पूर्व पार्षद अजय पोरवाल एवं गोपाल सिंह चौहान ने भाजपा कार्यालय जरिये अध्यक्ष, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष रविंद्र श्रीमाली, नगर विधायक एवं प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया, देहात जिलाध्यक्ष, महापौर एवं नगर निगम आयुक्त के खिलाफ भाजपा भवन की बिल्डिंग को अवैध बताते हुए अंतरिम अस्थाई निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र पेश किया था. इस मामले पर आज सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शान्तिलाल पामेचा ने अदालत में प्रार्थना पत्र पेश किया कि वादी पक्ष की ओर से जिस निर्माण को हटाने की मांग की वह तीन मंजिला इमारत है जिसकी डीएलसी दर के अनुसार 50 लाख से अधिक का मूल्य होता है और वाद में मूल्यांकन मात्र 400 रूपए करके नीचे की अदालत में दावा पेश किया जिसमें 2 लाख के मूल्यांकन दावे को सुनने का ही अधिकार है, जबकि उचित वाद मूल्यांकन किए जाने पर 50 लाख बनता है जो कि इस अदालत की सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है. अधिवक्ता ने न्यायालय से आग्रह किया कि सर्वप्रथम वाद मूल्यांकन पर न्यायालय निर्णय करे और उसके बाद मामले में आगे की सुनवाई करे.

दूसरी तरफ अधिवक्ता अशोक सिंघवी ने महापौर चंद्र सिंह कोठारी को पक्षकार से हटाने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया. पीठासीन अधिकारी सुश्री ममता ने दोनों प्रार्थना पत्र स्वीकार कर उन पर निर्णय आगामी 14 अगस्त तक के लिए सुरक्षित रखा है.

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