तिहरे हत्याकांड के अभियुक्तों को मिली फांसी की सजा रद्द

जयपुर, 15 मार्च (उदयपुर किरण). राजस्थान हाईकोर्ट ने अजमेर के क्रिश्चियनगंज थाना इलाके में नवंबर 2011 हुए तिहरे हत्याकांड के चार अभियुक्तों को मिली फांसी की सजा को रद्द कर दिया है. अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि अभियुक्तों की प्रकरण में संलिप्तता नहीं पाई गई है. न्यायाधीश केएस अहलुवालिया और न्यायाधीश बीएल शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश आरोपी डायमंड डिसिल्वा उर्फ सन्नी, महेश, रुबिन साइमन न्यूटन उर्फ बौनी और मल्लाकी जोंस की अपील और राज्य सरकार के डेंथ रेफरेंस पर सुनवाई करते हुए दिए. मामले के अनुसार मेरी रोज ने क्रिश्चियनगंज थाने में 22 नवंबर 2011 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि पडौस में उसकी भाभी अपने दो लडकों के साथ रहती थे.

पडौस में रहने वाली बच्ची ने आकर बताया कि उसकी भाई के घर से बदबू आ रही है. पुलिस को मिली सूचना पर जब घर का ताला तोडक़र देखा तो अंदर नीरू और उसके बेटे प्रमोद की लाश पड़ी थी. जिसके कीडे लग गए थे. वहीं कुछ दूरी पर स्थित कब्रिस्तान के पास कुए में दुसरे बेटे निर्मोद की लाश मिली. रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चारों अपीलार्थियों को गिरफ्तार किया. वहीं गत 4 अक्टूबर को एससी,एसटी कोर्ट ने अपीलार्थियों को फांसी की सजा सुनाई. जिसे चुनौती देते हुए अपील में कहा गया कि शिकायतकर्ता मेरी रोज ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी. निचली अदालत ने साक्ष्य नहीं होने के बावजूद अपीलार्थियों को फांसी की सजा सुनाई. जबकि सुप्रीम कोर्ट तय कर चुका है कि अपवादों को छोडक़र ऐसे मामलों में फांसी की सजा नहीं सुनाई जा सकती. जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अपीलार्थियों को मिली फांसी की सजा को रद्द कर दिया है.


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