जलवायु परिवर्तन चिंता का विषय, हो रहीं कई समस्याएं : नीतीश कुमार

पटना, 13 जुलाई (उदयपुर किरण). बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जलवायु परिवर्तन पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि इसकी वजह से वर्षा में कमी, भूजल स्तर में गिरावट, पेयजल का संकट, सूखे की स्थिति, बाढ़ की स्थिति जैसी अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं.
“राज्य में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदाजनक स्थिति पर विमर्श” विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को शनिवार को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने यहां कहा कि बिहार में मॉनसून की शुरुआत 15 जून से होती है. आकंड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले यहां 1200-1500 मि.मी. वर्षा होती थी लेकिन पिछले 30 वर्ष के औसत आकलन के आधार पर 1000 मि.मी. वर्षा हुई है. उन्होंने कहा कि पिछले 13 वर्षों से औसत 778 मि.मी. ही वर्षा हुई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम विज्ञान विभाग ने पिछले सामान्य वर्षों की तुलना में इस वार वर्षा कम होने का अनुमान लगाया था. उन्होंने कहा कि इस वर्ष जून में कम वर्षा की संभावना उन्होंने पहले ही जता दी थी.
बढ़ते तापमान पर चिंता प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रीन गैस प्रभाव के कारण तापमान बढ़ा है जिससे जलवायु परिवर्तन आया है. कार्बन डायऑक्साइड, मिथेन, नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैस को जलवायु परिवर्तन के लिए उन्होंने जिम्मेदार ठहराया. वाहनों की बढ़ती संख्या, कारखाने, विकास के बदलते पैमाने जैसे अप्राकृतिक कारणों की वजह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है. उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र में लोगों को पर्यावरण के बारे में जागरूक करने का आह्वान करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि लोगों से जब पर्यावरण सम्बन्धित विषयों की चर्चा करेंगे तभी लोगों में चेतना आएगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने जलवायु और पर्यावरण से संबद्ध विभागों के साथ मिलकर स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का गठन किया, ताकि विभिन्न चीजों पर निगरानी रहे  और इसके अलावा अन्य विभागों को भी जिम्मेदारी दी गई है. बाढ़ एवं सुखाड़ की सम्भावनाओं को भी ध्यान में रख कर सरकार ने संबंधित सभी विभागों के साथ बैठक कर विस्तृत कार्य योजना तैयार की. उन्होंने कहा कि नेपाल में और उत्तर बिहार में अभी कुछ दिनों से वर्षा हो रही है, जिससे कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है. इसे देखते हुए संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए सभी तैयारी कर ली गई है.
हर घर नल का जल योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत नल से जल तो उपलब्ध कराया जा रहा है लेकिन पेयजल का दुरुपयोग न हो इसके लिए लोगों को सजग करना होगा. लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए हर घर बिजली उपलब्ध करा दी गई है. अक्षय ऊर्जा और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की सरकार की योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सभी सरकारी दफ्तर की छत पर सौर प्लेट लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है.
गिरते भू -जल स्तर पर चिंता जाहिर करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि भूगर्भ जल को बचाने के लिए सार्वजनिक चापाकल, सार्वजनिक कुओं का जीर्णोद्धार कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि औसतन 2 से 7 फीट जलस्तर में गिरावट आयी है. भू-गर्भ जल को बनाये रखने के लिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार ने योजना बनायी है. फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ वातावरण में प्रदूषण फैलता है बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में तापमान ज्यादा बढ़ने से मगध क्षेत्र में कई लोगों की मृत्यु हुई. जलवायु में हो रहे विरोधाभासी परिवर्तन पर उन्होंने कहा कि एक ओर तापमान में वृद्धि हो रही है तो दूसरी ओर वज्रपात से मृत्यु भी हो रही है और साथ ही वर्षा भी कम हो रही है. मुजफ्फरपुर में एईएस से कई बच्चों की मौत हुई है. यह सब वातावरण में आ रहे बदलाव के कारण हो रहा है.
उन्होंने कहा कि बिहार के बंटवारे के बाद बिहार का हरित आवरण क्षेत्र काफी कम हो गया था. इस कमी को दूर करने के लिए 22 करोड़ पौधे लगाए गए. अब बिहार का हरित आवरण क्षेत्र 15 प्रतिशत हो गया है और इसे 17 प्रतिशत करने का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों एवं सूखा से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए कई कार्य किए जा रहे हैं. राज्य के खजाने पर पहला अधिकार और बड़ा अधिकार आपदा पीड़ितों का रहने की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में जनप्रतिनिधियों को अपने इलाके में लोगों की मदद में तत्पर रहना चाहिए. जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने इलाके में लोगों को सामान्य दिनों में जागरूक करते रहने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि हरियाली बढ़ाने,जल संरक्षण करने का प्रयास करना आवश्यक है.
ग्लोबल वार्मिंग की दुनिया के अन्य देशों में हो रही चर्चा पर उन्होंने कहा कि बिहार में भी इसकी चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की इस विषय पर राय आने के बाद योजनाएं बना कर अभियान चलाया जाएगा जो और प्रभावी होगा.
संगोष्ठी में आपदा प्रबंधन विभाग, कृषि विभाग, जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. संगोष्ठी में विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारून रशीद, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, राज्य सरकार के मंत्री, बिहार विधानमंडल के जनप्रतिनिधि समेत वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे.

 

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