चमकी बुखार के भय से, फीकी हुई लीची की मिठास

हरिद्वार, 04 जुलाई (उदयपुर किरण). बिहार में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (एइस) या चमकी बुखार की वजह से करीब 150 बच्चों की मौत हो चुकी है. चमकी बुखार का असर न केवल आम इंसान को डरा रहा है, बल्कि इसकी चपेट में अब बाजार भी आ चुका है. क्योंकि चमकी बुखार को लीची से जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसे में लीची का बाजार पूरी तरह चरमरा चुका है. हालात ये हो गए हैं कि लोगों ने लीची खरीदना तक बंद कर दिया है. उत्तराखंड में जहां कुछ दिनों पहले लीची 120 से 140 रुपये किलो बिक रही थी तो अब इसके भाव गिरकर 60 से 70 रुपये पर आ गए हैं. ऐसे में लीची से जुड़े व्यापारियों की परेशानी बढ़ गई है. व्यवसायियों को लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है.

गौरतलब है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में एक एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार का प्रकोप फैला हुआ है. इस बीमारी के कारण बिहार में 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. चमकी बुखार के फैलने के बाद यह भी चर्चा तेजी से फैली हुई है कि लीची के कारण इस बुखार का वायरस तेजी से फैल रहा है. कई दिन से व्हाट्सएप और फेसबुक पर इस तरह की पोस्ट वायरल हो रही है. जिनमें लीची के कारण ही इस चमकी बुखार का वायरस फैलने की बात कही जा रही है. उत्तराखंड में भी लीची की अच्छी पैदावार है. यहां हरिद्वार के सुभाष गढ़, बादशाहपुर, कनखल ज्वालापुर, मंगलूर क्षेत्र के अलावा देहरादून में ज्यादा पैदा होती है. जिसे दूसरे राज्यों में भेजा जाता है, लेकिन अब इसकी ब्रिकी पर असर पड़ गया है. फल व्यापारी नसीम ने बताया कि कुछ दिन पहले तक वो रोज 10 से 15 किलो लीची बेचा करता था, लेकिन अब ये ब्रिकी न के बराबर है. चमकी बुखार के कारण लोग लीची खरीदना पंसद नहीं कर रहे हैं. इसीलिए उन्होंने लीची लाना बंद कर दिया है.

हालांकि उत्तराखंड में इस तरह को कोई मामला सामने नहीं आया है. लीची और चमकी बुखार को लेकर जिस तरह की बाते सामने आ रहीं हैं उसके बारे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लक्सर की डिप्टी सीएमओ डॉ. अनिल वर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ये धारणा बिल्कुल गलत है कि लीची से चमकी बुखार फैलता है. यह एक एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी मस्तिष्क ज्वर है. इसके पेशेंट को ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाना चाहिए साथ ही साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें.

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