गॉफ ने भारतीय टीम की जमकर तारीफ की

90 के दशक वाली आक्रामक ऑस्ट्रेलियाई टीम जैसा बताया

लंदन . इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज डेरेन गॉफ ने भारतीय टीम की जमकर तारीफ करते हुए कहा है कि वह 1990 के दशक की ऑस्ट्रेलियाई टीम की तरह खेल रही है. गॉफ ने कहा कि भारतीय टीम केवल जीत के इरादे से मैदान में उतरती है. उन्होंने कहा, ‘इस भारतीय टीम की मानसिकता 90 के दशक वाली आक्रामक ऑस्ट्रेलियाई टीम की तरह है. जो विरोधी टीम को दबाव में लाने के बाद हर हाल में जीत दर्ज करने के इरादे से उतरती थी. गॉफ ने कहा कि पिछले माह हुए ऑस्ट्रेलिया दौरे में जिस प्रकार भारतीय टीम ने पिछड़ने के बाद वापसी की है उसकी जितनी ज्यादा प्रशंसा की जाये वह कम है.

वहीं अब इंग्लैंड के खिलाफ भी भारतीय टीम ने चार मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला हारने के बाद भी 2-1 की बढ़त हासिल कर ली है. इसके बाद भी गॉफ ने उम्मीद जताई कि उनकी टीम सीरीज में 2-2 की बराबरी हासिल करेगी. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो यह शानदार परिणाम होगा हालांकि यह आसान नहीं होगा. दोनो टीमों के बीच टेस्ट सीरीज का चौथा मुकाबला चार मार्च से अहमदाबाद (Ahmedabad) में खेला जाएगा.

भारत ने अहमदाबाद (Ahmedabad) में दिन-रात्र प्रारुप के तीसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड को दोनों पारियों में 112 और 81 रन पर आउट कर दस विकेटों से मैच जीता. यह मैच दो दिन के अंदर ही समाप्त हो गय था. इससे पहले चेन्नई (Chennai) में भारतीय टीम ने दूसरे टेस्ट में 317 रन से बड़ी जीत दर्ज की थी. गॉफ साल 2000 में वेस्ट इंडीज को हेडिंग्ले टेस्ट में दो दिन में हराने वाली इंग्लैंड टीम में शामिल थे. उन्होंने तब सात विकेट लेकर इंग्लैंड की जीत में अहम भूमिका निभाई थी. गॉफ ने कहा, ‘इंग्लैंड की इस टीम को लगातार दो मैचों में हार मिली है, ऐसे में उसके लिए वापसी करना आसान नहीं रहेगा. इसका एक कारण यह भी है कि लगातार हार से खिलाड़ी मानसिक दबाव में भी आ जाते हैं.’
गॉफ ने कहा कि जिस प्रकार टेस्ट की जगह टी20 को वरीयता मिल रही है, उससे टीम का प्रदर्शन टेस्ट में नीचे आ रहा है क्योंकि खिलाड़ियों को सीमित ओवरो के लिए तरोताजा रखने रोटेशन नीति अपनायी जा रही है. ऐसे में टेस्ट टीम को कई बार अनुभवी खिलाड़ियों के बिना ही उतरना पड़ता है.

इस पूर्व गेंदबाज ने कहा कि इंग्लैंड में अधिकारियों ने सीमित ओवरों की क्रिकेट को प्राथमिकता देते हुए पूरी सीरीज के दौरान खिलाड़ियों को आराम देने के लिए रोटेशन नीति अपनायी जो सही नहीं है.
साथ ही कहा कि अगर जो कप्तान जो रूट की जगह मैं रहता तो मुझे भी यह नीति सही नहीं लगती. मैं रुट की स्थिति समझ सकता हूं क्योंकि मेरा मानना ​​है कि सीमित ओवरों की क्रिकेट को प्राथमिकता दी जा रही है. सीमित ओवरों के कप्तान इयान मोर्गन को टेस्ट टीम से ज्यादा प्राथमिकताएं मिल रही है. इंग्लैंड बोर्ड (ईसीबी) की नजरें भारत में होने वाले टी20 विश्व कप पर लगी हैं.

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