खैर की लकड़ी की तस्करी के आरोप में पांच गिरफ्तार

खैर की लकड़ी की तस्करी के आरोप में पांच गिरफ्तार

उदयपुर, 16 मार्च (उदयपुर किरण). राज्य पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की जयपुर और उदयपुर यूनिट ने मेवाड़ से खैर की लकड़ी की तस्करी पर लगाम के लिए बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. एसओजी टीम ने उदयपुर में नाकाबंदी कर और तस्करों का पीछा कर 14 टन खैर की लकड़ी से लदा ट्रक, इसके साथ चल रहे दो चारपहिया वाहन भी जब्त किए हैं. कार्रवाई के दौरान एसओजी टीम और तस्करों के बीच संघर्ष भी हुआ जिसमें एक कांस्टेबल और तस्करों को चोटें भी आईं. जानकारी के अनुसार मुखबिर की सूचना पर एक टीम ने कीर की चौकी और दूसरी टीम ने डबोक के पास नाकाबंदी की.

कीर की चौकी पर नाकाबंदी देख संदिग्ध ट्रक पहले ही रुक गया. एसओजी टीम वहां पहुंची तो ट्रक के साथ उसको एस्कॉर्ट कर रही दो स्कॉर्पियो में बैठे पांच बदमाश एसओजी टीम से उलझ गए. एसओजी टीम से धक्का-मुक्की कर तस्करों ने ट्रक को भगा दिया और खुद भी भागने का प्रयास किया. एसओजी टीम ने तीन तस्करों को गिरफ्तार कर लिया, दो तस्कर मौके से फरार हो गए. मंगलवाड़ की तरफ फरार हुए ट्रक की जानकारी इस टीम ने नाकाबंदी में डबोक के पास खड़ी दूसरी एसओजी टीम को दी. इस पर इस टीम ने ट्रक का पीछा करना शुरू कर दिया और चित्तौडग़ढ़ जिले के चिकारड़ा में ट्रक को पकड़ चालक, खलासी को गिरफ्तार कर 14 टन लकड़ी बरामद की. एसओजी जयपुर और उदयपुर की टीम ने 14 टन खैर की लकड़ी से लदा ट्रक, दो स्कॉर्पियो, पांचों पकड़े गए आरोपितों को भींडर थाने में सुपुर्द कर इनके खिलाफ मामला दर्ज करवाया है.

पकड़े गए आरोपितों में सादुलखेड़ा, निकुंभ चित्तौडग़ढ़ निवासी असलम पुत्र अजीज खान पठान, गुलाम हुसैन पुत्र शेर मोहम्मद, अयूब पुत्र मोहम्मद दराज, ट्रक चालक गाजीपुर, यूपी निवासी तौहीद खान पुत्र शहनवाज खान, खलासी भिवंडी, मुंबई निवासी रवीन्द्र पुत्र रामचन्द्र धोंद को गिरफ्तार किया है. पूछताछ में तस्करों ने बताया कि यह खैर की लकड़ी गुजरात और मुंबई तक जानी थी. यह 300 रुपये किलो के अनुसार बिकती है. उदयपुर और मेवाड़ से खैर की लकड़ी की बड़े स्तर पर तस्करी चल रही है. इससे पान में लगने वाला कत्था बनाया जाता है. एक महीने में वन विभाग की टीमों ने भी संभाग में करीब 10 ट्रक पकड़े हैं. पहले मेवाड़ में चंदन बहुतायत में पाया जाता था, लेकिन इसकी बड़े स्तर पर हुई तस्करी के चलते वनों से चंदन खत्म हो गया. अब तस्करों की नजर खैर की लकड़ी पर है.

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