कोर्ट और सरकार के आदेश भी नहीं मान रहे स्कूल, निजी स्कूल संचालक मांग रहे ज्यादा फीस · Indias News

कोर्ट और सरकार के आदेश भी नहीं मान रहे स्कूल, निजी स्कूल संचालक मांग रहे ज्यादा फीस


भोपाल (Bhopal). फीस को लेकर प्रदेश के निजी स्कूल संचालक कोर्ट और सरकार (Government) के आदेश भी नहीं मान रहे हैं. कोरोनावायरस के कारण जारी लॉकडाउन (Lockdown) के तहत प्रदेश भर में कोई भी स्कूल खुले नहीं है, लेकिन अभिभावकों पर फीस जमा करने का दबाव डाला जा रहा है. इस संबंध में शासन ने आदेश दिया था कि लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान निजी स्कूलों को केवल शिक्षण शुल्क लेना होगा. लेट फीस और अभिभावकों पर फीस का दबाव नहीं बनाना होगा.

अब निजी स्कूल शिक्षण शुल्क में ही स्पोर्ट्स, मेस, बस, स्मार्ट क्लास चार्ज सभी को समायोजित कर मांग रहे हैं. इस संबंध में अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी के पास शिकायत की है, लेकिन अभिभावकों को एक ही जवाब मिल रहा है कि फीस संबंधी मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो कुछ नहीं कर सकते हैं. वहीं कुछ निजी स्कूल बस और मेस चार्ज में 50 फीसदी का डिस्काउंट देकर फीस जमा करने के मैसेज अभिभावकों को भेज रहे हैं. इससे अभिभावकों में नाराजगी है. अभिभावकों का कहना है कि जब स्कूल बस का इस्तेमाल ही नहीं किया और बच्चा खेला ही नहीं तो स्कूल वाले फीस कैसे ले सकते हैं.

फीस को लेकर मध्य प्रदेश सरकार (Government) के आदेश के अनुसार लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान निजी स्कूलों को केवल शिक्षण शुल्क लेना होगा. शासन ने यह भी कहा था कि विलंब शुल्क न लगाएं और न ही अभिभावकों पर फीस का दबाव बनाएं, सिर्फ ट्यूशन फीस वसूलें. इस सत्र में फीस वृद्घि नहीं की जाए. हाईकोर्ट इंदौर (Indore) बेंच ने 16 जून को राज्य सरकार (Government) के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें सरकार (Government) ने स्कूलों पर फीस न बढ़ाने, फीस वसूली के लिए दबाव न बनाने, विलंब शुल्क न लगाने, किश्तों में फीस लेने जैसी राहत दी थी. अब 28 जुलाई को सुनवाई होगी और स्कूलों से लेखा-जोखा मांगा है. जबलपुर (Jabalpur)हाईकोर्ट ने 25 जून को एक स्कूल के खिलाफ सुनवाई में हाईकोर्ट जबलपुर (Jabalpur)ने केवल ट्यूशन फीस लेने के लिए आदेश दिए हैं.

कई निजी स्कूल अब अभिभावकों पर तिमाही फीस जमा करने का दबाव डाल रहे हैं. यह जमा नहीं करने पर ऑनलाइन कक्षा से बच्चों का नाम हटाया जा रहा है. इस संबंध में पालक महासंघ के अध्यक्ष कमल विश्वकर्मा का कहना है कि निजी स्कूल फीस को लेकर मानने को तैयार नहीं है तो अब हम अभिभावकों के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे. इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी नितिन सक्सेना का कहना है कि फीस का मामला न्यायालय में विचाराधीन है. कुछ स्कूलों के खिलाफ शिकायत मिली है कि वे शासन के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं. उन पर कार्रवाई की जाएगी.

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