केंद्रीय कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले

केंद्रीय कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले

देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने में जुटी केंद्र की मोदी सरकार ने बुधवार को तमाम बड़े फैसले लेकर खेती, बुनियादी ढांचे, सैन्य सेवाओं तथा आम आदमी के कल्याण की दिशा में एक और कदम बढा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय कैबिनेट और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में ये तमाम फैसले लिए गए।

बुनियादी ढांचाः 
देश में बुनियादी ढांचे की मंजूरी के लिए  दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में लॉजिस्टिक हब को मंजूरी दी गई है।  1504 किमी. के वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर में फ्रेट गांव भी तैयार किए जाएंगे। हरियाणा के नंदनाल चौधरी गांव को फ्रेट गांव की तरह विकसित किया जाएगा। इस कॉरिडोर के लिए 1029.49 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।

साथ ही एनसीआर में मेट्रो को बढावा देने के लिए दिल्ली मेट्रो कॉरिडोर के तहत मेट्रो अब नोएडा सिटी सेंटर से सेक्टर 62 तक जायेगी। 6 .67  किलोमीटर के इस रुट पर 1967 करोड़ रूपये खर्च होंगे। इसमें भारत सरकार की हिस्सेदारी 340 .60 करोड़ रुपए होगी।  
 
खेती और सिंचाईः 
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने सिंचाई को और प्रभावी बनाने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत समर्पित “सूक्ष्‍म सिंचाई कोष” यानी एमआईएफ  स्‍थापित करने के लिए नाबार्ड के साथ 5,000 करोड़ रुपये की आरंभिक राशि देने की मंजूरी दे दी है। 2018-19 के लिए 2,000 करोड़ रुपये और 2019-20 के दौरान 3,000 करोड़ रुपये की राशि का इस्‍तेमाल होगा। एमआईएफ प्रभावशाली तरीके से और समय पर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप  के लक्ष्य में मदद करेगा।

सैन्य सेवाओं को तकनीकी मददः
रक्षा सेवाओं के लिए वैकल्पिक संचार नेटवर्क बिछाने के उद्देश्‍य से स्‍पेक्‍ट्रम के लिए नेटवर्क परियोजना का बजट 11,330 करोड़ रुपये बढ़ाने को मंजूरी दे दी गयी है। बीएसएनएल  की ये परियोजना 24 महीने की अवधि में पूरी हो जाएगी। इससे बड़े पैमाने पर रक्षा सेवाओं की संचार क्षमता में वृद्धि होगी।  

स्वास्थ्यः 
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने झारखंड को एम्स को तोहफा दिया है। झारखंड में बैजनाथ धाम के नाम से विख्यात देवघर में एम्स बनाने का फैसला किया है। एम्स के निर्माण के लिए 1107 करोड़ की वित्तीय मदद दी जाएगी। देवघर में एम्स के निर्माण से न केवल झारखंड के लोगों को लाभ मिलेगा बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार के लोगों को भी उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सकेगा। एम्स के साथ ही मैडिकल कॉलेज भी खुलेगा। 

सरकारी विवादों के हल पर जोरः 
सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों, के बीच तथा अन्‍य सरकारी विभागों और संगठनों के साथ उनके वाणिज्यिक विवादों को निपटाने की प्रणाली को सशक्‍त बनाने को मंजूरी दे दी। कैबिनेट ने सचिवों की समिति के सुझावों के आधार पर यह फैसला लिया है। इसके तहत ऐसे विवादों को अदालतों के जरिए निपटाने के बजाय इसके लिए एक सशक्‍त संस्‍थागत प्रणाली विकसित की जाएगी।  

इसके तहत सबसे पहले मामला उपसमिति के पास भेजा जाएगा। यदि समिति विवाद का समाधान नहीं कर पाती है तो ऐसी स्थिति में दूसरे स्‍तर पर इन्‍हें विवादों को कैबिनेट सचिव को भेजे जाने की व्‍यवस्‍था है। इस मामले में कैबिनेट सचिव का फैसला अंतिम होगा और सभी के लिए बाध्‍यकारी भी होगा। विवादों के जल्द निपटारे के लिए पहले स्‍तर पर तीन म‍हीने की अवधि निर्धारित की गयी है।

इसके अलावा कुछ अहम फैसलों की बात करें तो

राष्ट्रीय बायो फ्यूल नीति 2018 को मंजूरी दी गयी है। इसके तहत 2022 तक फ्यूल इम्पोर्ट 10 फीसदी घटाने का लक्ष्य रखा गया है। आंध्रप्रदेश में   902 करोड़ की लागत से सेंट्रल यूनिवर्सिटी को मंजूरी दी गयी है। ब्रूनेई के साथ कर समझौते को मंजूरी दी गयी है। होमियोपैथिक परिषद पर सरकार ने एक अध्यादेश को भी मंजूरी दी है। इसके अलावा सरकार ने लोगों के हित के लिए कई अहम फैसले भी लिए हैं।

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