‘किताब’ : किताबें कुछ कहना चाहती हैं, तुम्हारे पास रहना चाहती हैं!

‘किताब’ : किताबें कुछ कहना चाहती हैं, तुम्हारे पास रहना चाहती हैं!

थिएटर, फिल्म और टीवी में अपनी एक्टिंग से एक खास पहचान बना चुके टॉम अल्टर का निधन पिछले साल 30 सितंबर को हो गया था. लेकिन उस समय अपनी आखिरी फिल्म की शूटिंग पूरी कर चुके थे. हाल ही में उनकी आने वाली फिल्म किताब की पहली स्क्रीनिंग दिल्ली में की गई. फिल्म दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स के इस्तेमाल पर बनाई गई है. इतना ही नहीं फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे हम इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स के चलते किताबों से दूर होते जा रहे हैं. दिल्ली में हुई स्क्रीनिंग के अलावा, एक पैनल डिस्कशन भी हुआ, जिसमें कई जानी-मानी हस्तियां शामिल थीं. पैनल में सुलभ स्वच्छता आंदोलन के फाउंडर बिंदेश्वर पाठक, हिंदी राइटर और नॉवलिस्ट मैत्री पुष्पा और फिल्म के डायरेक्टर कमलेश के मिश्रा शामिल थे.
इस अवसर पर प्रसिद्द लेखिका मैत्रेयी पुष्पा ने कहा कि किताबों की संस्कृति कभी खत्म नहीं होगी. उन्होंने किताबों के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किताबों का इतिहास अगर देखें, तो वह दौर जब भोजपत्र पर लिखा जाता था, तब से लेकर आज तक किताबें कई बार बदलीं, कई नए नए प्रयोग किये गए. लेकिन किताबों के महत्त्व पर कोई असर नहीं पड़ा.
बता दें कि पैनल डिस्कशन के बाद फिल्म का प्रीमियर हुआ. फिल्म किताब ने अपने खुबसूरत फिल्मांकन और दिल को छू लेने वाली कहानी से सभी का मन मोह लिया. 25 मिनट की इस शोर्ट फिल्म में मुख्य पात्रों का कोई भी संवाद नहीं है, लेकिन इसके बाद भी शानदार अभिनय और जरुरी विषयवस्तु से सजी यह फिल्म अपने संदेश को लोगों तक पहुंचा देती है. फिल्म में लाइब्रेरी के प्रति लोगों की कम होती रुचि को दिखाया गया है. फिल्म में कोई संवाद नहीं है, इसीलिए सिर्फ बैकग्राउंड संगीत के माध्यम से ही फिल्म आगे बढ़ती हैं.

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