कार्यवाही की भनक लगने पर रिश्वत नहीं लेने का मामला: हेड कांस्टेबल के खिलाफ चालान पेश


उदयपुर. केस को कमजोर करने और जमानत कराने की एवज में तीन हजार रूपए की रिश्वत लेने के दौरान भनक लग जाने पर मौके से फरार हुए हेड कांस्टेबल के खिलाफ बुधवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्पेशल यूनिट ने अदालत में आरोप पत्र पेश किया. अदालत ने आरोपी के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया है.

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्पेशल यूनिट के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र सिंह भाटी के निर्देशानुसार रोतड़ पोस्ट कचोटिया पीपलखूंट प्रतापगढ़ निवासी नरेंद्र पुत्र राजमल मीणा ने 15 सितम्बर 2017 को ब्यूरो की इकाई प्रतापगढ़ पर हेड कांस्टेबल रंगलाल को एक लिखित रिपोर्ट दी कि मेरे पिता राजमल 13 सितम्बर 2017 को गांव से मोटरसाइकिल पर खोखरिया स्कूल जा रहे थे, रास्ते में सरकारी हॉस्पीटल के सामने एक औरत सडक़ पार करते टकरा गई, जिससे औरत के पेट में चोट आई. पुलिस थाना कोतवाली प्रतापगढ़ में पिता के खिलाफ मामला दर्ज हुआ. पिता के भी चोटें आई. पिता के इलाज के दौरान हेड कांस्टेबल श्याम सिंह ने मुझे व पिता को राजीनामे के नाम पर मेरे से पांच हजार रूपए की मांग की. तीन हजार रूपए में बात तय हुई. थाने पर बुला कर हेड कांस्टेबल ने मुझे बताया कि सामने वाली पार्टी राजीनामे के लिए तैयार नहीं है और मुकदमा दर्ज कर लिया है. मामले को रफादफा करने के लिए खर्चापानी के दस हजार रूपए और देने के लिए कहा और साथ ही कहा कि केस हल्का कर दूंगा. पैसे कम करने के लिए बात कही तो आठ हजार रूपए पर राजी हुआ और यह भी कहा कि पिता की जमानत करवा दूंगा. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चिरंजीलाल मीणा के निर्देशानुसार हेड कांस्टेबल रंगलाल द्वारा उसी दिन रिश्वत की राशि की मांग का सत्यापन कराया और सत्यापन के बाद परिवादी के पिता की जमानत कराने की एवज में तीन हजार रूपए लेते और पांच हजार रूपए की और मांग की. 19 सितबर को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार निरीक्षक नरेंद्र सिंह ने अग्रिम ट्रेप कार्यवाही आयोजित कर आरोपी हेड कांस्टेबल श्याम सिंह को रंगे हाथों पकडऩे की कार्यवाही की, लेकिन हेडकांस्टेबल को भनक लगने पर रिश्वत नहीं ली.

इस मामले में आरोपी हिंगोरिया छोटीसादड़ी प्रतापगढ़ निवासी प्रतापगढ़ जिले के कोतवाली थाने का तत्कालीन निलंबित हेड कांस्टेबल श्याम सिंह पुत्र सूर्यवीर सिंह को हाल ही में 25 जून को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो टीम ने गिरफ्तार किया था. आरोपी पर आरोप के पर्याप्त साक्ष्य होने पर उसके खिलाफ पीसी एक्ट 1988 की धारा 7, 13 (1)(डी), 13 (2) में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के सहायक निदेशक अभियोजन अधिकारी गणेश शंकर तिवारी के जरिये अदालत में आरोप पत्र पेश किया. पत्रावली पर प्रथम दृष्टया योग्य साक्ष्य प्राप्त होने पर विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण मामलात) के पीठासीन अधिकारी गोपाल बिजोरीवाल ने आरोपी हेड कांस्टेबल के खिलाफ प्रसंज्ञान लिया है.

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