कांकेर, राजनांदगांव व महासमुंद में 18 को मतदान, भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला

35 लाख मतदाता डालेंगे वोट, फ्लैग मार्च कर जवानों ने दिलाया सुरक्षित मतदान का भरोसा

रायपुर, 17 अप्रैल (उदयपुर किरण). छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण का प्रचार थम गया है. इस बार प्रचार में ज्यादा शोर-गुल सुनाई नहीं पड़ा है. नक्सल प्रभावित कांकेर, महासमुन्द और राजनांदगांव संसदीय सीट पर 18 अप्रैल को मतदान होना है. छत्तीसगढ़ निर्वाचन आयोग के अनुसार सुरक्षा के व्यापक और कड़े प्रबंध किये गये हैं. मतदान के एक दिन पहले सुरक्षाबल और पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से जगह-जगह फ्लैग मार्च कर जनता को सुरक्षित मतदान करने का भरोसा दिलाया है. नक्सल प्रभावित सभी सीटों पर लगभग 35 लाख मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे. इन सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधा मुकाबला संभावित है.

प्रचार थमने के साथ ही मतदान दलों ने अपने-अपने केंद्रों का रुख कर लिया है. सभी तीनों सीटों पर पिछले चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. इस बार भी इन सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही सीधा मुकाबला है. चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां पूरी ताकत झोंक चुकी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरबा और भाटापारा में चुनावी सभाएं करके बीजेपी के पक्ष में माहौल बना दिया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी दर्जन भर से ज्यादा सभाएं कर बीजेपी पर तीखा हमला किया है. इन सभी इलाकों में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किये गए हैं. साथ ही हेलिकॉप्टर, ड्रोन, मोटरसाइकल, जीप, वैन और एंटी लैंडमाइन व्हीकल तक के वाहनों को सुरक्षा में लगाया गया है. उल्लेखनीय है कि नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार कर रखा है. पहले दौर के मतदान के दो दिन पहले बस्तर में बीजेपी विधायक भीमा मंडावी समेत चार पुलिसकर्मी नक्सली हमले में शहीद हो चुके हैं.

राजनांदगांव लोकसभा सीट

दूसरे चरण की सबसे प्रतिष्ठापूर्ण सीट राजनांदगांव मानी जा रही है. यहां पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह कई रैलियां और सभाएं कर चुके हैं. राजनांदगांव विधानसभा सीट से ही डॉ. रमन सिंह विधायक चुने गये हैं. यह चुनाव उनके भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. डॉ. रमन के पुत्र अभिषेक इस संसदीय सीट से सांसद हैं. इस बार यहां कुल 14 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. राजनांदगांव लोकसभा सीट में कुल मतदाताओं की संख्या 17 लाख 10 हजार 682 है जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 8 लाख 55 हजार 739 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 8 लाख 54 हजार 934 है. ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या यहां 09 है. कांग्रेस ने यहां से अपने पूर्व विधायक भोलाराम साहू को टिकट दिया है. साहू 2013 में खुज्जी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे. 2018 में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था.

वही बीजेपी ने भोलाराम साहू के मुकाबले संतोष पांडेय के रूप में नए चेहरे पर दांव लगाया है. पांडेय ने एक बार पहले 2008 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी की टिकट पर पंडरिया सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इस बार लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उनपर फिर से भरोसा जताया है. वहीँ बसपा से यहां रविता लकड़ा मैदान में हैं. पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के पुत्र सांसद अभिषेक सिंह का टिकट काटकर बीजेपी ने संतोष पांडेय को टिकट देकर कठोर निर्णय लिया है. इस संसदीय सीट की सीमा महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से लगी हुई है. कांकेर जिले की नजदीकी का भी असर यहां पड़ता है. इसका बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित क्षेत्र गढ़चिरौली से लगा हुआ है. इस संसदीय क्षेत्र का मोहला-मानपुर इलाके में नक्सलियों का प्रभाव सबसे ज्यादा है. यह वही क्षेत्र है, जहां 2009 में नक्सलियों के हमले में तत्कालीन एसपी वीके चौबे शहीद हो गए थे. यहां पर साहू मतदाताओं की बड़ी संख्या है जो जीत-हार में प्रभावशाली भूमिका अदा कर सकती है.

कांकेर लोकसभा सीट

कांकेर लोकसभा सीट से कुल 9 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. सीधा मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही है. इस संसदीय सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 15 लाख 52 हजार 75 है. इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 लाख 66 हजार 32 और महिला मतदाताओं की संख्या 7 लाख 86 हजार 10 है. ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या 33 है. बीते तीन आम चुनाव से कांग्रेस यहां से बुरी तरह से पराजित होती रही है. बीजेपी ने लगातार तीनों बार विजय हासिल की है. कांकेर में आदिवासी मतदाताओं की संख्या ज्यादा है और वे ही उम्मीदवारों का भाग्य तय करते हैं. यहाँ से कांग्रेस ने बीरेश ठाकुर को मैदान में उतारा है. बीरेश ठाकुर भानुप्रतापपुर के पूर्व जनपद अध्यक्ष हैं. वे लंबे समय से आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ते रहे हैं, जबकि बीजेपी ने मोहन मंडावी को टिकट दिया है. मोहन मंडावी पेशे से शिक्षक रहे हैं. शिक्षकों के अधिकारों को लेकर उन्होंने कई आंदोलनों में हिस्सा लिया है. वे कांकेर जिले के शिक्षा संघ शाखा उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं. उनके पास 2 सौ से अधिक रामायण मण्डली है जो गांव-गांव जाकर रामायण का पाठ करती है. इसमें मोहन मुख्य प्रवचनकार की भूमिका में रहते हैं. इसका फायदा उन्हें निश्चित तौर पर मिलेगा. पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार के कार्यकाल में वे छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के सदस्य भी रहे हैं. बसपा ने यहां से सुबे सिंह को टिकट दिया है. राज्य बनने के बाद से अब तक हुए तीनों आम चुनाव में कांकेर में मतदान का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है. पिछले चुनाव में यहां 70 फीसद से अधिक मतदान हुआ था. 2009 में 57 और 2004 में 48 फीसद वोट पड़े थे.

महासमुंद लोकसभा सीट

महासमुंद से कुल 13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. महासमुन्द में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से ज्यादा है. यहां कुल मतदाताओं की संख्या 16 लाख 32 हजार 962 है, जिसमें से 8 लाख 10 हजार 783 पुरुष मतदाता और महिला मतदाताओं की संख्या 8 लाख 22 हजार 158 है. ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या यहां 21 है. कांग्रेस ने इस सीट से अपने वरिष्ठ नेता और लगातार दूसरी बार अभनपुर से विधायक चुने गए धनेंद्र साहू को टिकट दिया है. धनेंद्र साहू पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व अविभाजित मध्यप्रदेश से लेकर राज्य की पहली सरकार तक में रहे हैं. अजित जोगी के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में वे उनके मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं. उधर बीजेपी ने इस संसदीय सीट से चुन्नीलाल साहू को टिकट दिया है. साहू पार्टी के पूर्व विधायक हैं. संसदीय सीट पर साहू समुदाय का बोलबाला है. चुन्नीलाल साहू अपने समाज के कई मंचों और संगठनों के संरक्षक और अध्यक्ष रह चुके हैं. बहुजन समाज पार्टी से धानसिंह कोसरिया अपना भाग्य आजमा रहे हैं. महासमुंद लोकसभा चुनाव में 2004 में मतदान 66 फीसद, 2009 के लोकसभा चुनाव में करीब 57 फीसद और 2014 में महज 48 फीसद मतदान हुआ था. तीनों ही सीटों में प्रचार अभियान को देखें तो कांग्रेस से भाजपा आगे रही है. राजनांदगांव में भाजपा का प्रचार अभियान जहां पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के हाथ रहा, वहीं कांग्रेस की कमान उसके खाद्य मंत्री मोहम्मद अकबर ने संभाली है. कांकेर में स्वयं भाजपा अध्यक्ष विक्रम अपनी टीम के साथ बेहद सक्रिय रहे हैं. कांग्रेस से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांकेर और महासमुन्द में अपने सहयोगी मंत्रियों के साथ कई दौरे किये हैं. महासमुन्द में कांग्रेस के मंत्री रह चुके तेज तर्रार विधायक अजय चन्द्राकर एवं पूर्व आईएएस आरपीएस त्यागी पार्टी के लिए रणनीति बनाकर चुनाव प्रचार खूब किया है.

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