एमड़ी सरपंच व उसके साथी के खिलाफ चालान पेश, आबादी भूमि की फर्जी एनओसी कर पंचायत को पहुंचाया राजस्व नुकसान

एमड़ी सरपंच व उसके साथी के खिलाफ चालान पेश, आबादी भूमि की फर्जी एनओसी कर पंचायत को पहुंचाया राजस्व नुकसान


उदयपुर। ग्राम पंचायत एमड़ी के सरपंच ने पद का दुरूपयोग करते हुए अपने चहेते को कीमती आबादी भूमि की एनओसी जारी कर पंचायात को तीन लाख का राजस्व नुकसान पहुंचाने के मामले में राजसमंद एसीबी ने सरपंच एवं उसके साथी के खिलाफ भष्ट्राचार की विभिन्न धाराओं में चालान पेश किया।

भष्ट्राचार निरोधक ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश चौधरी ने एमड़ी ग्राम पंचायत के सरपंच एमड़ी राजसमंद निवासी रामलाल पुत्र मोहनलाल कुमावत ने नौगामा एमड़ी राजसमंद निवासी लालूराम पुत्र परसराम पालीवाल के साथ मिलीभगत कर आराजी 78 सरकारी बिलानाम आबादी भूमि को खुर्द-बुर्द कर ग्राम पंचायत को तीन लाख से अधिक का राजस्व नुकसान पहुंचाने वाले दोनों आरोपियों के खिलाफ अभियोजन अधिकारी गणेशशंकर तिवारी के जरिये विशेष न्यायालय (भष्ट्राचार निवारण मामलात) की अदालत में पीसी एक्ट 1988 की धारा 13 (1) (सी) (डी), 13(2) एवं भादंसं की धारा 409 व 120 बी में आरोप पत्र पेश किया। यह दोनों आरोपी राजस्थान उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत पर चल रहे है।

एमड़ी ग्राम पंचायत के सरपंच रामलाल कुमावत ने नौगामा ग्राम की आराजी नंबर 78 बिलानाम सरकारी आबादी भूमि थी, जिसकी एनओसी एक आठ सितंबर 2013 को जारी की गई, जिसके आधार पर अनापत्ति आधार पत्र प्रमाण पत्र पर भूखंड धारक लालूराम पालीवाल ने 20 सितंबर 2013 को लालूराम ने धोइंदा निवासी देवीलाल पुत्र रामचंद्र कुमावत के पक्ष में विक्रय इकरार प्राप्त कर तीन लाख रुपए में जमीन का विक्रय इकरार पंजीयन करा दिया। जब इस धांधली का पता तो राजसमंद जिला कलेक्टर ने आठ अगस्त 2014 को अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरविंदकुमार जाखड़ से जांच कराई। जांच में पाया ग्राम पंचायत एमड़ी के गांव नौगामा की आबादी भूमि को जिला कलेक्टर के आदेश से 13 फरवरी 2002 को चारागाह भूमि से आबादी भूमि की गई। इसके बाद इस जमीन को धोइंदा निवासी देवीलाल पुत्र रामचंद्र कुमावत को तीन लाख रुपए में विक्रय कर विक्रय इकरार की रजिस्ट्री करा दी।

एनओसी का पंचायत कार्यालय में कोई रिकॉर्ड नहीं पाया गया। सरपंच द्वारा लाभार्थी को नियम विरूद्ध भूखंड का स्वामित्व अधिपत्य, प्रमाण पत्र जारी किया गया। इसके आधार पर लाभार्थी द्वारा इस भूखंड कर विक्रय कर पंचायत कोष में आर्थिक नुकसान पहुंचा कर स्वयं द्वारा आर्थिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से सरपंच रामलाल द्वारा पद व अधिकारों का दुरप्रयोग कर अपने चहेते लालूराम को नियम के खिलाफ प्रमाण पत्र जारी कर विक्रय विलेख को पंजीयन करा दिया, जो प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाया जाता है। दोनों आरोपियों ने आपसी मिलीभगत कर पंचायत एमड़ी को तीन लाख का नुकसान पहुंचाने का मामला प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाया जा रहा है। इस पर दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया गया।

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*