उत्खनन में मिले 3500 साल पुराने अवशेषों का किया वैज्ञानिक विश्लेषण

उत्खनन में मिले 3500 साल पुराने अवशेषों का किया वैज्ञानिक विश्लेषण

उदयपुर, 12 जून (उदयपुर किरण). जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय के साहित्य संस्थान द्वारा पिछले आठ वर्षों के दौरान गिलूंड के समीप छतरीखेड़ा, जवासिया व पछमता से प्राप्त 3500 साल पुराने मृद भांडों, पुराविधियों, लघु अश्व उपकरणों का वैज्ञानिक तरीकों से विश्लेषण किया गया. इसके साथ ही 300 से अधिक पुराविधियों को साहित्य संस्थान को नियमानुसार सौंपा गया. प्रो.ललित पाण्डेय, डॉ. प्रबोध, डॉ. इशा प्रसाद, केनेसा स्टेट विश्वविद्यालय, यूएसए की प्रोफेसर टेरेसा पिछले 15 दिनों से इस कार्य में लगे हुए थे.

रिसर्च के समापन पर बुधवार को कुलपति प्रो. एसएस सारंगदेवोत, पीजी डीन प्रो. जीएम मेहता ने सभी शोधार्थियों से चर्चा की. डॉ. पांण्डेय ने बताया कि छतरीखेड़ा में बसावट की नियमितता है. यहां से आधुनिककाल, मध्यकाल, पूर्वमध्यकाल, पूर्व ऐतिहासिक कालीन, ताम्र पाषाणकालीन बसावट के अवशेष मिले हैं. डॉ. टेरेसा रेकजेक ने बताया कि गिलूण्ड सभ्यता में नगरीकरण के साथ सूर्य पूजन, व्यापार, कृषि एवं मिट्टी के बर्तनों की कलाकारी देखते ही बनती है.

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