आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच करने दिल्ली से पहुंची टीम, गंदगी देख नाराज

कोरबा .आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती व शिशुवती माताओं और किशोरी बालिकाओं को कई योजनाओं के तहत पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाता है. इन्हें केन्द्रीयकृत योजनाओं का भी लाभ दिया जाता है. इसका लाभ हकीकत में हितग्राहियों को मिल रहा है या नहीं, यह जानने यूनिसेफ दिल्ली की टीम जिले में भ्रमण कर रही है.

उधर टीम के यहां पहुंचने की जानकारी मिलते ही महिला व बाल विकास विभाग भी सभी संभावित केंद्रों को व्यवस्थित करने कह दिया था, ताकि टीम के सदस्यों को कोई शिकायत न हो. बुधवार (Wednesday) के बाद गुरुवार (Thursday) को दो सदस्यीय टीम कोरबा ग्रामीण परियोजना के गांवों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में पहुंच कर वहां के हालात जानी.

कोरकोमा क्षेत्र के एक आंगनबाड़ी केन्द्र में पहुंची टीम ने बच्चों के लिए बनाए जाने वाले गरम भोजन को देखकर आश्वस्त नजर आई, लेकिन वहां गंदगी दिखी. इस पर उन्होंने कार्यकर्ता और सहायिका को रोज केंद्र की साफ.-सफ ाई करने को कहा, ताकि बच्चों को किसी तरह की परेशानी न हो. पास के ही एक गांव में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंची टीम ने रजिस्टर का अवलोकन की, जिसमें बच्चों व महिला हितग्राहियों जो पोषित होते हैं, उनका रिकार्ड देखते ही. सवाल किया कि जितने बच्चे दर्ज हैं क्या वे आज आए थे.

इस पर कार्यकर्ता ने जवाब दिया कि अभी कोविड-19 (Covid-19) के कारण पालक बच्चों को नहीं भेजना चाहते हैं. ऐसे बच्चों को गरम भोजन के स्थान सूखा राशन व उनके लिए अन्य प्रोटीन युक्त आहार घर पहुंचाकर देते हैं. इस जवाब से टीम के मेंबर सहमत नजर आए. वहीं अपने अपने सेक्टर में कोई खामियां न आए यह सोचकर सेक्टर सुपरवाइजर भी संबंधित आंगनबाड़ी केन्द्रों को सजग कर रखी थीं.महिला व बाल विकास विभाग के डीपीओ आनंद किसपोट्टा ने कहा कि केन्द्रीयकृत योजनाओं की वास्तविकता जानने यूनिसेफ की टीम का यह रूटीन दौरा है. इससे केन्द्रों द्वारा पोषित होने वाले बच्चों व महिला हितग्राहियों को दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार की गुणवत्ता बनी रहती है. भ्रमण से योजनाओं की समीक्षा भी हो जाती है.

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