अखिलेश के लिए घाटे का सौदा रहा गठबंधन, मायावती को मिला लाभ

अखिलेश के लिए घाटे का सौदा रहा गठबंधन, मायावती को मिला लाभ

लखनऊ, 23 मई (उदयपुर किरण). प्रदेश में सत्रहवीं लोकसभा के लिए चुनाव में एक बार फिर भाजपा का दबदबा रहा. 80 लोकसभा सीटों वाले राज्य में पार्टी जहां पहले पायदान पर रही. वहीं समाजवादी पार्टी को बसपा-रालोद से गठबंधन का लाभ नहीं मिला. हालांकि मायावती के लिए ये फायदे का सौदा रहा. भाजपा की लहर के बावजूद बसपा 2014 में शून्य सीटों से जहां 10 सीटों तक पहुंचने में सफल रही. वहीं रालोद का सफर 2014 के बाद 2019 में शून्य पर ही समाप्त हो रहा है.

चुनाव आयोग के मुताबिक रात साढ़े नौ बजे तक प्रदेश में भाजपा ने 24 सीटों पर जीत दर्ज कर ली, जबकि 38 सीटों पर उसके उम्मीदवार जीत की तरफ बढ़ रहे हैं. वहीं उसका सहयोगी अपना दल-एस दो सीटों पर जीत दर्ज कर चुका है. इस तरह भाजपा गठबंधन की 64 सीटों पर जीत तय है. वहीं ​सपा-बसपा-रालोद गठबंधन में बसपा ने 04 सीट पर जीत दर्ज की और 06 सीटों पर उसके उम्मीदवार आगे हैं. सपा 01 सीट जीतने के साथ 04 सीटों पर आगे चल रही है. इस तरह गठबंधन के हिस्से में मात्र 15 सीटे आ रही हैं. वहीं कांग्रेस महज रायबरेली की सीट पर सिमट गई है. भाजपा, बसपा,सपा, कांग्रेस और रालोद को क्रमश: 49.55, 19.29, 17.98, 6.28 और 1.67 प्रतिशत मत मिले हैं.

उप्र में 2017 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने राहुल गांधी से हाथ मिलाया था. तब दोनों पार्टियों ने यूपी को ये साथ पसन्द है का जमकर नारा लगाया. हालांकि चुनाव नतीजों में भाजपा ने धमाकेदार प्रदर्शन करके पूर्ण बहुमत हासिल किया. 2019 आते-आते अखिलेश का राहुल से मोहभंग हुआ और लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा की धुर विरोधी बसपा से गठबंधन किया. अखिलेश के इस निर्णय की उनके पिता मुलायम सिंह यादव तक ने आलोचना की. हालांकि गठबंधन कायम रहा और इसमें रालोद को भी शामिल किया. इसके तहत बसपा ने 38, सपा ने 37 और रालोद ने 03 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे. वहीं रायबरेली और अमेठी सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी गई.

अखिलेश को उम्मीद थी कि गठबंधन के बात जातीय समीकरण गठबंधन के पक्ष में होंगे और केन्द्र में सरकार बनने में उनकी अहम भूमिका होगी. हालांकि गुरुवार को रुझान आते-आते अखिलेश का सपना एक बार फिर टूट गया. विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन पार्टी के लिए नुकसान का सौदा साबित हुआ. पार्टी के हिस्से में 2014 की तरह पांच सीटे तो आ रही हैं, लेकिन उसके परिवार के सदस्य ही जनता का भरोसा जीतने में सफल रहे. यादव कुनबा पिछली बार की तुलना में और कमजोर हुआ.

पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव जरूर आजमगढ़ से सपा की लाज बचाने में सफल रहे. उनके सामने भाजपा के दिनेश लाल यादव निरहुआ ने चुनौती तो दी, लेकिन सफल नहीं हुये. 2014 में यहां से मुलायम सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी.

इसी तरह मैनपुरी की जनता ने एक बार फिर मुलायम सिंह यादव पर भरोसा जताया. यहां दूसरे स्थान पर भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य रहे. 2014 में यहां से मुलायम सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी. बाद में उनके इस्तीफे से रिक्त हुई इस सी टपर पार्टी के अक्षय यादव विजयी हुये थे.

इसके अलावा इस बार पार्टी मुरादाबाद सीट अपनी झोली में डालने में सफल रही. यहां उसके उम्मीदवार डॉ. एस.टी.हसन ने भाजपा के कुंवर सर्वेश कुमार को हराया, जो​ पिछली बार विजयी रहे थे.

इसके अलावा रामपुर में कांटे की टक्कर के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता मो. आजम खां अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा की जयाप्रदा से आगे हैं. 2014 में डॉ. नेपाल सिंह ने यहां से कमल खिलाया था.

इसके अलावा सम्भल से पार्टी के डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क़ भी भाजपा के परमेश्‍वर लाल सैनी को हराया. 2014 में यहां से भाजपा के सत्यपाल सिंह ने जीत दर्ज की थी.

इसकी तुलना में बसपा गठबंधन के वोटों को अपने पक्ष में करने में सफल रही. अम्बेडकर नगर से पार्टी उम्मीदवार रितेश पाण्डेय अपनी प्रतिद्वंदी भाजपा उम्मीदवार और प्रदेश सरकार में मंत्री मुकुट बिहारी से बढ़त बनाये हुये हैं. उनकी जीत तय मानी जा रही है. 2014 में यहां से भाजपा के हरिओम पाण्डेय ने जीत दर्ज की थी.

अमरोहा से कुंवर दानिश अली ने भाजपा के कंवर सिंह तंवर को हराया, जो पिछली बार जीत दर्ज करने में सफल रहे थे.  बिजनौर से पार्टी उम्मीदवार मलूक नागर अपने प्रतिद्वंदी भाजपा के राजा भारतेन्द्र सिंह से काफी बढ़त बनाये हुये हैं, जो पिछली बार विजयी हुये थे. गाजीपुर से चौंकाने वाला प्रदर्शन करते हुए पार्टी के अफजाल अंसारी ने केन्द्रीय मंत्री भाजपा उम्मीदवार मनोज सिन्हा को शिकस्त की कगार पर ला दिया है.

घोसी से हाथी पर सवार होकर अतुल कुमार सिंह अपनी प्रतिद्वंदी भाजपा के हरिनारायण से बढ़त बनाये हुये हैं, जो 2014 में जीत दर्ज करने में सफल हुये थे. बसपा की यहां से जीत तय है. इसी तरह जौनपुर से भाजपा के कृष्‍ण प्रताप सिंह से बसपा के श्‍याम सिंह यादव जीत की बढ़त बनाये हुये हैं. कृष्ण प्रताप 2014 में विजयी रहे थे. लालगंज से पार्टी की संगीता आजाद ने 2014 में विजयी भाजपा की नीलम सोनकर को हराने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.  नगीना से बसपा के गिरीश चन्द्र ने 2014 में विजयी भाजपा उम्मीदवार डॉ. यश्वन्त सिंह को हराया.

इसी तरह सहारनपुर से हाजी फजर्लुरहमान ने 2014 में विजयी भाजपा उम्मीदवार राघव लखनपाल को शिकस्त दी. श्रावस्ती से भी राम शिरोमणि ने 2014 में विजयी भाजपा उम्मीदवार दद्दन मिश्रा को हराया. इसके साथ ही रालोद उम्मीदवारों में बागपत से जयन्‍त चौधरी, मुजफ्फरनगर से अजित सिंह और मथुरा से कुंवर नरेन्द्र सिंह पीछे चल रहे हैं.

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