पानी में आधा पीपीएम अधिक फ्लोराइड हो तो हो सकती है फ्लोरोसिस की बीमारी

बांसवाड़ा.  पेय जल में फ्लोराइड की मात्रा 0.5 पीपीएम से ज्यादा 3 से 5 पीपीएम हो तो ये आपकी हड्डियों व दांतों के लिए घातक हो सकती है. लगातार ऐसे पानी का सेवन करने से फ्लौरोसिस जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है. यह जानकारी फ्लोरोसिस बीमारी को लेकर मंगलवार को खंड मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय घाटोल जिला बांसवाड़ा में खंड स्तरीय प्रशिक्षण में दी गई.

प्रशिक्षण में खंड मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शाहनवाज खान ने बताया कि गरीब व दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे भारतीयों के भोजन में कैल्सियम, विटामिन व आयरन के अभाव के चलते 0.5 पीपीएम से अधिक मात्रा वाले पानी का लगातार सेवन भी फ्लोरोसिस दे सकता है. प्रशिक्षण में यह तथ्य भी उभरकर आया कि फ्लोरोसिस की रोकथाम के लिए मात्र स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के बजाय जलदाय विभाग, नगर-ग्रामीण निकाय, केमिस्ट व डेंटिस्ट का भी समन्वय आवश्यक है. जिला फ्लोरोसिस सलाहकार डॉ. रतन सिंह  ने फ्लोरोसिस से बचाव, पहचान व उपचार सम्बन्धी मापदंडों की जानकारी दी. प्रशिक्षण में बीसीएमओ बीकानेर डॉ. निलेश सोनी सहित चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ ने भाग लिया.

घाटोल में खंड लेखाकार मनीष, खंड लेखाकार मनीष लोदवाल एवं अजीत गर्ग, खंड प्रबंधक एनआरएचएम निधि निधि शर्मा, खंड नोडल अधिकारी अभिषेक जोशी, सीएसई इंचार्ज डॉ. अंकित जैन एवं डॉक्टर उर्वेश सेठ आदि ने प्रशिक्षण में भाग लिया.

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