इस्तीफा देने के बाद सांसद सावित्री बाई फूले बोलीं, दोबारा भाजपा में नहीं लौटूंगी

लखनऊ, 6 दिसम्बर (उदयपुर किरण). बहराइच से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद सावित्री बाई फूले ने गुरुवार को पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. इस दौरान उन्होंने भाजपा पर जमकर निशाना साधा. कहा कि भाजपा दलित, पिछड़ा व मुस्लिम विरोधी है और आरक्षण खत्म करने की साजिश रच रही है. साथ ही उन्होंने कहा कि जब तक वह जिंदा हैं, दोबारा भाजपा में वापस नहीं लौटेंगी.

सावित्री बाई ने भाजपा पर देश के संविधान को बदलने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया. कहा कि संविधान और आरक्षण लागू करने के लिए उन्होंने यह त्याग दिया है. मेरा निर्णय बहुत कठोर होगा. आगे चलकर भाजपा के लिए आघात साबित होगा. साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि अपने कार्यकाल तक वह सांसद बनी रहेंगी.

फूले ने कहा कि भाजपा दलितों के विरोध में है. बाबा साहेब की प्रतिमा पूरे देश में कई जगह तोड़ी गई लेकिन तोड़ने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. बार-बार भाजपा के बड़े नेता संविधान बदलने की बात कहते हैं लेकिन आज तक व्यक्तिगत सेक्टर में एससी-एसटी के लिए आरक्षण लागू करने का वादा नहीं निभाया गया.’ गौरतलब है कि सावित्री बाई फूले लगातार भाजपा पर हमलावर रही हैं. वह कई बार पार्टी लाइन से हटकर बयान देती रही हैं.

उन्होंने राम मंदिर और आरक्षण मुद्दे पर भी पार्टी को कटघरे में खड़ा किया था. सांसद ने राम मंदिर को मंदिर न बता देश के तीन प्रतिशत ब्राह्मणों की कमाई का धंधा करार दिया था. इसके अलावा उन्होंने भगवान राम को शक्तिहीन बताते हुए कहा था कि अगर उनमें शक्ति होती तो अयोध्या में राम मंदिर बन जाता. वहीं ताजा प्रकरण में उन्होंने भगवान हनुमान के सियासी विवाद में कूदते हुए कहा था कि हनुमान दलित थे और मनुवादियों के गुलाम थे.

अगर लोग कहते हैं कि भगवान राम हैं और उनका बेड़ा पार कराने का काम हनुमान जी ने किया था. उनमें अगर शक्ति थी तो जिन लोगों ने उनका बेड़ा पार कराने का काम किया, उन्हें बंदर क्यों बना दिया? उनको तो इंसान बनाना चाहिये था लेकिन इंसान ना बनाकर उन्हें बंदर बना दिया गया. उनकी पूंछ में आग लगा दी गई, उनके मुंह पर कालिख पोत दी गयी. चूंकि वह दलित थे इसलिये उस समय भी उनका अपमान किया गया.

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