फिल्मों से अश्लीलता ख़त्म कराई जाएगी

मुंबई, 15 नवंबर (उदयपुर किरण). मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के भीतर अश्लीलता के खिलाफ क्रांति का बिगुल बज़ गया है. 5 लाख सदस्यों वाली फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज ने ऐलान किया है कि भोजपुरी फिल्मों में अब अश्लीलता नहीं बर्दास्त की जाएगी. ऐसी फिल्मों का बनना, सेंसर होना और उनका प्रदर्शन किया जाना सब रोका जाएगा. फेडरेशन अपने सदस्यों को आगाह कर रहा है कि अश्लील फिल्मों का बनना सामाजिक अपराध है. इसलिए कोई उनके निर्माण या प्रदर्शन से संलग्न न हो. जो लोग ऐसा नहीं करेंगे, उनकी सदस्यता रद्द की जाएगी.

फेडरेशन ने इस बात का भी ऐलान किया है कि मुंबई, इलाहाबाद, पटना और रांची हाई कोर्ट में पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा भोजपुरी मनोरंजन उद्योग में फ़ैली अश्लीलता के खिलाफ दायर की जा रही याचिका में फेडरेशन भी सह याचिकाकर्ता बनेगा. पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान और फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लाइज ने यह घोषणा आज 15 नवंबर को अंधेरी के कार्तिक काम्प्लेक्स में सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन के दफ्तर में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में की. दोनों संगठनों ने इस बात का भी ऐलान किया है कि पहली जनवरी 2019 से रिलीज़ होनेवाली हर भोजपुरी फिल्म की पूर्वांचल के समाज और संस्कृति को जानने वाले किसी विद्वान व्यक्ति से समीक्षा कराई जाएगी, और पूर्वांचल के समाज के मानदंडों के हिसाब से यदि कुछ गलत पाया गया तो सेंसर बोर्ड के सामने यह सवाल प्रखरता से खड़ा किया जाएगा कि उसने इस फिल्म को कैसे पास किया?

प्रेस कांफ्रेंस को फेडरेशन की तरफ से फेडरेशन के अध्यक्ष बी एन तिवारी, महासचिव अशोक दुबे, कोषाध्यक्ष संजू श्रीवास्तव, प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य शरद देवराम शेलार और पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की ओर से पूर्व मंत्री चंद्रकांत त्रिपाठी, अश्लीलता विरोधी अभियान की ब्रांड एम्बेसडर पद्मश्री डॉ. शोमा घोष, प्रतिष्ठान के सचिव ओम प्रकाश,मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर रहे एडवोकेट विजय सिंह और गायक अविनाश तिवारी ने सम्बोधित किया. प्रेस वार्ता को सम्बोधित कर रहे सभी लोगों का मानना था कि भोजपुरी मनोरंजन उद्योग में अश्लीलता इन दिनों चरम पर है. यह स्त्रियों की अस्मिता पर हमला है. इससे बच्चों, किशोरों, तरुणों का भविष्य बिगड़ रहा है. समाज की छवि बिगड़ रही है. और भाषा, साहित्य, संस्कृति और समाज सबकी अवमानना हो रही है.

डॉ. शोमा घोष ने कहा कि बहुत मीठी बोली है भोजपुरी, बहुत संपन्न संस्कृति की,बहुत विस्तृत फलक की. चंद तिजारती लोग उसे बिगाड़ रहे हैं. प्रतिष्ठान के सचिव ओम प्रकाश ने विभिन्न हाई कोर्ट में फाइल की जा रही याचिका का विवरण देते हुए कहा कि धारा 21 में दिए गए जीने के हक़ के मौलिक अधिकार को विचार का मुख्य बिंदु बनाया जा रहा है. इस मामले में यह याचिका एक अनोखी याचिका भी बनेगी. सवाल यह भी है कि भाषा को, साहित्य को, संस्कृति को, लोक कलाओं को, मर्यादाओं को, मूल्यों को, मानकों को भी जीने का, सम्मान से जीने का कोई हक़ है कि नहीं? उन्होंने कहा कि यही याचिका उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखण्ड के राज्य मानवाधिकार आयोग में भी दाखिल की जा रही है. उन्होंने कहा कि निर्माताओं, निर्देशकों, प्रदर्शकों, वितरकों, कलाकारों आदि को मिलाकर कुल 600 लोगों को व्यक्तिगत चिट्ठी भेज कर भी उनसे आग्रह किया गया है वे भोजपुरी फिल्मों में अश्लीलता के कारण न बनें. ओम प्रकाश ने विश्वास जताया कि जल्द ही निर्माता और निर्देशक एसोसिएशन भी इस लड़ाई में साथ होंगे. इस बारे में इम्प्पा के अध्यक्ष टी पी अगरवाल और इफ्टडा के अध्यक्ष अशोक पंडित से बात हो रही है.

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