दीपावली आज : प्रदोष काल शाम 4:58 से 5:57 बजे, लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 6:21 से 8:17 तक

कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन दीपावली यानी दिवाली का त्योहार मनाया जाता है. दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, भैया दूज आदि त्योहार दिवाली के साथ-साथ ही मनाए जाते हैं. इस दिन उद्योग-धंधे के साथ-साथ नवीन कार्य करने एवं पुराने व्यापार में खाता पूजन का विशेष विधान है. अमावस्या तिथि 6 नवंबर दिन मंगलवार को ही रात में 10 बजकर 6 मिनट से लग जा रही है जो 7 नवंबर दिन बुधवार को रात में 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी.

रदोष काल में दीप जलाना उत्तम फलदायक

इस प्रकार उदया तिथि में अमावस्या का मान सूर्योदय से ही मिल रहा है. साथ ही प्रदोष काल का भी बहुत ही उत्तम योग मिल रहा है. इस प्रकार प्रदोष काल में दीपावली पूजन का श्रेष्ठ विधान है तथा प्रदोष काल में ही दीप प्रज्वलित करना उत्तम फल दायक होता है. िदन-रात के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहते हैं, जहां दिन विष्णु स्वरूप है वहीं रात माता लक्ष्मी स्वरूपा हैं, दोनों के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहते हैं. धर्म शास्त्रों के अनुसार दीपावली के पूजन में प्रदोष काल अति महत्वपूर्ण होता है. साथ ही सूर्योदय से रात 7:24 तक आयुष्मान योग तथा धूम्र योगा व्याप्त रहेगा.

व्यापार जगत के लिए अमावस्या पूजन शुभ

बुधवार को दीपावली एवं अमावस्या का पूजन बाजार जगत के लिए शुभदायी होगा. इस वर्ष अमावस्या व्यापिनी महा निशिथ काल का अभाव है. वैसे महा निशीथ काल की पूजा स्थिर लग्न सिंह में मध्यरात्रि 12:09 से 02:23 बजे के मध्य की जा सकती है. इस प्रकार निशा पूजा काली पूजा तांत्रिक पूजा के लिए स्थिर सिंह में किया जाएगा जो अति महत्त्वपूर्ण,अति शुभ एवं कल्याणकारी मुहूर्त है. शेष रात्रि भोर में सूप बजाकर दरिद्र का निस्तारण एवं लक्ष्मी का प्रवेश कराया जाएगा. प्रदोष काल शाम 4:58 से 5:57 बजे तक रहेगा.

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