14 फरवरी 1981 को गोलियों की तड़तड़ाहट से क्यों गूंज गया था बेहमई गाँव

70 के दशक में उत्तरप्रदेश में डकैतो का खासा वर्चस्व देखने को मिलता था. जहाँ जरायम और शियासत की जुगलबंदी के आधार पर शियासी दलों की तकदीर का फैसला भी किया जाता था.

बीहड़ और चम्बल के जंगलो में डकैतो ने मौत की इबारत कुछ इस कदर लिखी कि लोग आतंक के साए में जीने को मजबूर हो गए. ऐसे डकैतो की लम्बी जमात में एक दस्यु सुंदरी फूलन देवी का नाम भी सामने आया. जिसने बीहड़ में वर्षो से राज कर रहे डकैतो को पछाड़ कर जुर्म की दुनिया में कम समय के भीतर ही खासा नाम कमा लिया.

14 फरवरी सन 1981 को फूलन देवी ने कानपुर देहात के बेहमई गाँव में 20 क्षत्रियों को एक साथ कतार में खड़ा कर गोलियों से छलनी करके एक बड़े नरसंघार को अंजाम दिया था.
जिसके बाद फूलन देवी अखबारों की सुर्खिया बनने लगी. एक के बाद एक वारदातों को अंजाम देकर फूलन ने जरायम की दुनिया में नाम के साथ सोहरत भी हासिल कर ली.

जिसके बाद शियासत और जुर्म की जुगल बंदी सामने आई और फूलन ने सरकार के समक्ष आत्म समर्पण कर दिया और यहाँ से शुरू हुई डकैत फूलन देवी का राजनेता फूलन देवी बनने का सफर.

समाजवादी पार्टी से सांसदी का टिकट मिलने के बाद फूलन देवी ने यूपी के मिर्ज़ापुर से 1996 व 1999 में चुनाव लड़ा. दोनों ही बार चुनाव में जीत हासिल होने के बाद फूलन बतौर संसद सदस्य भारत के संसद भवन में बैठने लगी.

25 जुलाई 2001 को जब फूलन अपने सरकारी आवास से संसद भवन के लिए निकल रही थी तभी शेर सिंह राणा ने फूलन देवी की हत्या कर दी थी जिसके सत्तरह वर्ष बीतने के बाद अब कोर्ट शेर सिंह राणा को इस हत्या काण्ड में दोषी करार दिया है.

फूलन देवी पर पुलिस द्वारा अब पर अबतक 48 मुक़दमे दर्ज किये गए है जिनमे हत्या के तीस मुकदमो के साथ लूट व डकैती जैसी वारदातो का जिक्र किया गया है.

70 के दशक में उत्तर प्रदेश में डकैतो का खासा आतंक हुआ करता था जिसमे यहाँ के बीहड़ो में डकैतो की बाढ़ सी आ गयी थी और लगभग आधा दर्जन से अधिक गिरोह का पूरे बीहड़ में राज हुआ करता था.

इन डकैतो की इजाजत के बगैर उत्तर प्रदेश की पुलिस भी इन बीहड़ो में जाने कि हिमाकत तक नहीं करती थी. यही एक बड़ी वजह थी कि उस समय इन डकैतो का दबदबा समूचे उत्तर प्रदेश में था. इन्ही गिरोहो में एक गिरोह फूलन देवी का भी हुआ करता था.

जिस गिरोह का अंत फूलन के समर्पण के बाद हुआ और कुछ समय बाद फूलन देवी की मौत हो गयी लेकिन फूलन व उसके गिरोह पर दर्ज मुक़दमे आज भी चल रहे है.

इन्ही में से एक मुक़दमे में कानपूर देहात की डिस्ट्रिक कोर्ट ने अहम् फैसला सुनाया था जिसमे फूलन देवी के गिरोह में शामिल एक डकैत मान सिंह के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर कानपूर देहात व जालौन पुलिस के आलाधिकारियो को मान सिंह को तत्काल गिरफ्तार करने के निर्देश भी दिए गए थे. लेकिन सियासत के संरक्षण के कारण अब तक पुलिस के मान सिंह तक नहीं पहुंच सके है जबकि मान सिंह आज भी खुलेआम घूम रहा है.

तारीख 14 फरवरी सन 1981

ये दिन उत्तर प्रदेश के साथ पूरे देश को उस समय सख्ते में डालने के लिए पर्याप्त था. क्योंकि उस दिन कानपूर देहात के बेहमई गाँव में कुछ इस कदर हुआ था सामूहिक नरसंघार जिसमे एक साथ इसी गाँव 20 ठाकुरो को बर्बरता से पीटने के बाद एक साथ खड़ा कर फूलन देवी के गिरोह ने मौत के घाट उतार दिया था. तत्कालीन समय में फूलन के गिरोह में कई डकैत ऐसे थे जो आज मर चुके हैं लेकिन मुकदमा आज भी अदालत में लगातार जारी है.

शेर सिंह राणा ने क्या किया ?

वहीं दिल्ली में हुए फूलन देवी हत्या काण्ड में तेरह वर्ष के बाद कोर्ट ने शेर सिंह राणा को दोषी करार देते हुए सजा का एलान कर दिया है. जिसको लेकर पूरे बेहमई गाँव के लोगो में ख़ासा रोष व्याप्त है. यहाँ के लोगो का कहना है कि फूलन देवी जोकि खुद एक डकैत थी.

उसकी हत्या करने वाले को कोर्ट ने सजा सुना दी और खुद फूलन देवी ने एक साथ इसी जगह पर 20 ठाकुरो की हत्या कर उस समय विश्व के सबसे बड़े नरसंघार को अंजाम दिया था उस डकैत अंजाम दिए गए. इस नरसंघार के मामले में आज भी मुकदमा कोर्ट में चल रहा है जबकि इस मुक़दमे आरोपी रहे कई लोगो की मौत भी हो चुकी है. लेकिन अदालत में इन लोगों को महज तारीख के अलावा आज तक कुछ नहीं मिला.

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