धर्ममय माहौल में छह ने ली जैन दीक्षा, बीकानेर के माता-पिता-पुत्र-पुत्री शामिल

उदयपुर, 08 फरवरी (उदयपुर किरण). आचार्य रामलाल महाराज की निश्रा में आचार्य श्री नानेश ध्यान केंद्र ओस्तवाल प्लाजा के सामने सुंदरवास उदयपुर में हजारों श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति में श्री जैन भगवती दीक्षा का महोत्सव शुक्रवार सुबह विधिविधान से सम्पन्न हुआ. धर्ममय माहौल का उल्लास इतना था कि दीक्षा के निर्धारित समय सुबह 8 बजे पहले ही दीक्षा स्थल पर बना पांडाल खचाखच भर गया.

आयोजकों के अनुसार 15 हजार से ज्यादा श्रावक-श्राविकाएं श्री जैन भगवती दीक्षा महोत्सव में शामिल हुए. दीक्षा से पूर्व दीक्षार्थियों की सुंदरवास स्थानक से आचार्यश्री नानेश ध्यान केंद्र तक महा निष्क्रमण यात्रा निकली जिसमें सैकड़ों समाजों ने भाग लिया. दीक्षा स्थल पर पहुंचने के बाद आचार्य रामलाल महाराज की निश्रा में सभी दीक्षार्थियों जिनमें मुमुक्षु निर्मल मालू, मुमुक्षु चंदन देवी मालू, मुमुक्षु सपना लोढ़ा, मुमुक्षु निकिता कोटडिय़ा, मुमुक्षु नीरज मालू, मुमुक्षु क्षमता मालू को श्वेत वस्त्र धारण करवाए गए. इसके बाद आचार्य श्री ने करीब एक घंटे की विभिन्न धार्मिक क्रियाएं अनुष्ठान और मंत्रोच्चार के बीच सभी दीक्षार्थियों की मंगल दीक्षा संपन्न करवाई. दीक्षा के बाद सभी दीक्षार्थियों ने खड़े होकर के आचार्य की वंदना की एवं अपने मन के भाव व्यक्त किए.

दीक्षा प्रदान करने से पूर्व आचार्य ने कहा कि दीक्षार्थियों के परिवार जनों की तरफ से अनुज्ञा पत्र और अनुमति पत्र प्राप्त हो चुके हैं. आचार्य ने दीक्षा स्थल पर उपस्थित दीक्षार्थियों के परिवारजनों और समाजजनों से दीक्षा प्रदान करने की अनुमोदना भी करवाई तो सभी ने अपने हाथ खड़े कर दीक्षा की अनुमोदना की. दीक्षा संपन्न होने के बाद वहां उपस्थित साध्वी चरित्र आत्माओं ने मंगल गीत एवं बधाइयों का गायन किया दीक्षा सम्पन्न होने के बाद जयकारों से संपूर्ण पंडाल गूंज उठा. दीक्षा स्थल का नजारा ऐसा था कि वहां पर पांव रखने तक की जगह नहीं थी. देश भर से आए श्रावक-श्राविकाओं में इस अद्भुत और ऐतिहासिक नजारे के साक्षी बनने की होड़ मच गई. हर कोई इस ऐतिहासिक पल को अपनी आंखों में हमेशा के लिए कैद करना चाह रहा था बुजुर्ग युवा बच्चे महिलाएं युवतियां हर कोई दीक्षा महोत्सव को एक टक निहारते रहे. दीक्षा स्थल पर महिलाओं और पुरुषों के बैठने के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी.

किसी को भी परेशानी ना हो और किसी प्रकार की अव्यवस्था ना हो इसके लिए समाज की तरफ से समाज के कई समाज सेवक व्यवस्थाएं संभालने में लगे रहे. संघ अध्यक्ष नरेश सिंघवी ने बताया कि उदयपुर के इतिहास में पहली बार शुक्रवार को सुबह 8 बजे 6 जैनेश्वरी दीक्षाएं एक साथ हुईं. इनमें भी खास बात यह है कि 6 में से चार दीक्षाएं एक ही परिवार के सदस्यों ने ली जिनमें माता, पिता, पुत्र और पुत्री शामिल हैं. मालू परिवार के चार सदस्य एक साथ दीक्षा ग्रहण कर रहे हैं. मालू परिवार मूलत: नोखा बीकानेर के रहने वाला है. वर्तमान में सूरत में इनका व्यवसाय है.

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