जमुई (सु.) लोकसभा क्षेत्र: बहुत कठिन है डगर पनघट की….!

जमुई,14फरवरी (उदयपुर किरण).पिछले संसदीय चुनाव के पूर्व तीन जिलों के विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर जमुई(सु.)लोकसभा क्षेत्र का गठन हुआ है.जमुई संसदीय क्षेत्र में मुंगेर का तारापुर,शेखपुरा का शेखपुरा व जमुई जिले के सिकन्दरा,जमुई, झाझा और चकाई विधानसभा क्षेत्र शामिल हैंं.उल्लेखनीय है कि लंबे अरसे के बाद वर्ष 2009 में जमुई संसदीय क्षेत्र को पहचान मिली.एक जमाने में जमुई संसदीय सुरक्षित क्षेत्र बना था. बाद के दौर में यह मुंगेर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा बन गया.बताते चलें की नए परिसीमन में जमुई अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित संसदीय क्षेत्र बनाया गया है.

इस संसदीय क्षेत्र में एनडीए-महागठबंधन में बराबर की टक्कर होती रही हैं.उक्त क्षेत्र में साढ़े 15 लाख से ज्यादा वोटर हैं,जिसमें 8,27,898 पुरुष और 7,22,284 महिला वोटर हैं.गौरतलब है कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में लगभग 50 हजार वोटर पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे.इस लोकसभा क्षेत्र के 6 विधानसभा क्षेत्र में 3-3 पर एनडीए और महागठबंधन का कब्जा है.जमुई समाजवादी नेताओं की कर्मभूमि रही है.इस क्षेत्र से कई दिग्गज नेता आते हैं और हर राजनेता का अपने क्षेत्र में प्रभाव कायम है.बताते चलें कि जमुई जिले के 4 विधानसभा क्षेत्रों में बांका के राजद सांसद जय प्रकाश नारायण यादव और पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह की अच्छी और मजबूत पकड़ मानी जाती है.पूर्व मंत्री दामोदर राउत अति पिछड़ा के नेता माने जाते हैं.

इस क्षेत्र में जदयू,राजद और बीजेपी वोटरोंं की अच्छी खासी तादाद है.जमुई(सु.)संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं को इस बात की कसक है कि नए परिसीमन के बाद दोबारा अस्तित्व में आए जमुई लोकसभा क्षेत्र से 2009 में जदयू के भूदेव चौधरी प्रथम दफा चुनाव जीते थे,जबकि वर्ष 2014 में मोदी लहर में यहां से लोजपा प्रत्याशी चिराग पासवान को सफलता मिली.लोजपा के सांसद चिराग पासवान युवा हैं और उनमें भविष्य की संभावना नजर आती है, लेकिन यहां के स्थानीय लोगों के मन में इस बात की कसक साफ नजर आती है कि ज्यादातर मौकों पर उनके बीच का कोई अपना यहां का सांसद नहीं बन पाया.जमुई में जातीय समीकरण बड़ा फैक्टर माना जाता हैं.यूं तो सूबे बिहार में जातीय फैक्टर चुनाव में अहम रोल अदा करता रहा है जिससे जमुई लोकसभा क्षेत्र भी अछूता नहीं है.वैसे तो जमुई लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है लेकिन यहां पिछड़ी,अति पिछड़ी और अगड़ी जाति के वोटरोंं की अच्छी तादाद है जिसमें यादव – 3 लाख,राजपूत – 2 लाख,वैश्य – 2 लाख,भूमिहार- 1 लाख,मुस्लिम- 1.5 लाख,पासवान- 1 लाख,रविदास- 80 हजार,ब्राह्मण- 50 हजार,कायस्थ- 30 हजार बताये जाते हैं.इसके अलावा पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के वोटर भी यहां अच्छी संख्या में हैं जो चुनाव में हार-जीत तय करते हैं.आज़ादी की लड़ाई में भी जमुई के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था, लेकिन आज़ादी के बाद जमुई का जितना विकास होना चाहिए था उतना हुआ ही नहीं. विकास की दौड़ में जमुई काफी पीछे छूट गया.

गरीबी और पलायन इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या है.आज भी यहां दातून बेचकर अपनी जीविका चला रहे लोग आपको मिल जाएंगे.नक्सलवाद की पीड़ा केे दंश सेे जूझते जमुई लोकसभा क्षेत्र का बड़ा भू-भाग पड़ोसी राज्य झारखंड से सटा हुआ है.इस जिले की ज्यादातर जमीन पर जंगल और पहाड़ है.कई इलाकों में अब भी नक्सलियों का बोलबाला है. हालांकि हाल के वर्षों में नक्सलियों की पकड़ यहां कमजोर हुई है.उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुविधाएं नहीं होने के कारण यहां की साक्षरता दर भी बेहद कम है.जिले में शिक्षा के लिए कोई बड़ा संस्थान नहीं है.19 लाख आबादी वाले इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए मात्र 2 कॉलेज हैं.जो कॉलेज हैं वहां शिक्षकों के कई पद सालों से रिक्त हैं.जमुई जिले के किसी भी कॉलेज में पीजी की पढ़ाई नहीं होती.उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को दूसरे जिलों का रुख करना पड़ता है.जिले में सरकारी महिला कॉलेज भी नहीं है.इलाके के नौजवानों का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ेपन को दूर करने के साथ-साथ युवाओं को रोजगार से जोड़ने का काम होना चाहिए.

जमुई में खेती ही अर्थव्यवस्था का आधार है.यह क्षेत्र पूरी तरह से खेती पर निर्भर है,लेकिन विडंबना देखिए अब भी यहां के किसान खेती के लिए वर्षा पर निर्भर हैं.अगर बारिश नहीं हुई तो यहां सूखा तय है क्योंकि अब तक इस क्षेत्र में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है. सिंचाई के लिए 3 डैम का निर्माण भी कराया गया लेकिन रख-रखाव के अभाव में वो भी किसी काम का नहीं है.मरम्मत नहीं होने के कारण पुरानी नहरें भी अब किसी काम की नहीं हैं.शिक्षा और सिंचाई की लचर व्यवस्था का दंश युवा पीढ़ी झेल रही है.मजबूरी में उन्हें दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है. इस क्षेत्र में बड़े उद्योग की बात तो छोड़ दीजिए कुटीर और छोटा उद्योग भी नहीं लगा.उद्योग धंधे नहीं लगने का असर यहां को लोगों के जीवन यापन पर दिखता है.काम की तलाश में सैकड़ों लोग शहर पहुंचते हैं.

सांसद चिराग पासवान का दावा:-

वर्ष 2014 में इस क्षेत्र से सांसद चुने गए लोजपा नेता और संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान का दावा है कि उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में इस क्षेत्र में विकास की गंगा बहाने की पूरी कोशिश की.5 साल में सांसद निधि से क्षेत्र के विकास के लिए मिले 25 करोड़ रुपये खर्च किए.झाझा में केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना करवाई.जमुई जिले में मेडिकल कॉलेज खुलवाने की स्वीकृति दिलाई.सांसद निधि से जमुई संसदीय क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों पर 40 लाख रुपये खर्च किए. उनका दावा  है कि मेरी पहल से जमुई संसदीय क्षेत्र के रेलवे स्टेशन के सौदर्यीकरण के लिए 58 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई.जमुई में एफसीआई के जोनल कार्यालय की शुरुआत हुई.जमुई स्टेशन पर हावड़ा-हरिद्वार एक्सप्रेस का ठहराव शुरू हुआ.पटना-झाझा ईएमयू का देवघर तक विस्तार किया गया.सालों से लंबित बरनार जलाशय परियोजना पर काम शुरू हुआ.अपर किऊल जलाशय योजना और कुंडघाट जलाशय के जीर्णोद्धार का काम शुरू हुआ.झाझा-सोनो-चकाई-गिरिडीह नई रेल लाइन के लिए पहल की गई. झाझा-सोनो-चकाई-जसीडीह नई रेल लाइन के लिए 500 करोड़ की राशि स्वीकृत.1526 दिव्यांग के बीच कृत्रिम उपकरण का वितरण करवाया.जमुई संसदीय क्षेत्र में 219 स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर लगाया गया.सांसद के प्रयास से 600 स्थानों पर चापानल लगा.

2000 स्थानों पर सोलर लाइट लगा.चिराग पासवान ने जमुई संसदीय क्षेत्र में कुल 8 एम्बुलेंस दिया.ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पीपीसी सड़का का निर्माण कराया.इसके अलावा भी सांसद और उनकी पार्टी के लोग कई विकास कार्य करवाने का दावा कर रहे हैं.इस बार जमुई लोकसभा सीट से एक बार फिर लोजपा नेता चिराग पासवान एनडीए के उम्मीदवार होंगे.लोजपा को 5 सालों में चिराग पासवान के किए काम पर भरोसा है तो वहीं सहयोगी को उम्मीद है कि चिराग पासवान को जिताकर इस क्षेत्र की जनता एक बार फिर पीएम मोदी के हाथ को मजबूत करेगी.एनडीए को जहां पीएम मोदी और जमुई में चिराग पासवान के किए काम पर भरोसा है तो वहीं महागठबंधन के नेता इस क्षेत्र की समस्याओं को लेकर जनता के बीच जाने की सोच रहे हैं. महागठबंधन के नेताओं को उम्मीद है कि इस बार उन्हें यहां जीत मिलेगी.वैसे कहा जाता है कि राजनीति और मौसम का पूर्वानुमान लगाना अक्सर गलत माना जाता है.

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