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आयुर्वेद का संरक्षण जरूरी : महारावल जगमालसिंह

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बाँसवाड़ा। जिला पर्यटन उन्नयन समिति के संरक्षक तथा महारावल जगमालसिंह ने कहा है कि आयुर्वेद एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है और इसमें किसी भी रोग के स्थायी निदान की क्षमता विद्यमान है, ऐसे में इसका संरक्षण करते हुए पुनः जनप्रचलन में लाना होगा।

जगमालसिंह रविवार को यहां कुशलबाग मैदान में आयुर्वेद विभाग के तत्वावधान में आयोजित हो रहे उदयपुर संभाग स्तरीय आरोग्य मेले के तीसरे दिन आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।  इस मौके पर उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का प्रभाव स्थायी और कारगर है परंतु इसे दीर्घकाल तक नियमित रखना पड़ता है ऐसे में जिला मुख्यालय पर इस प्रकार के शिविरों में उपलब्ध हेाने वाली समस्त पद्धतियों युक्त केन्द्र का निर्माण करना बेहद जरूरी है।

समारोह में बतौर अतिथि संबोधित करते हुए छोटी सरवन प्रधान राजेश कटारा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में आयुर्वेद का बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है और अब इस युग में भी इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए घर-घर तक पहुंचाने की जरूरत है।    इस मौके पर राजपूत समाज के प्रतापभानूसिंह, राजेन्द्रसिंह आनंदपुरी, गुजरात ट्रस्ट के जनरल मैनेजर आर.के सैनी, सहायक निदेशक (जनसंपर्क) कमलेश शर्मा, समाजसेवी मनीष देव जोशी, उपभोक्ता परिषद सदस्य कमलेश शर्मा आदि बतौर अतिथि मंचासीन थे।

आरंभ में समस्त अतिथियों ने आयुर्वेद के प्रणेता भगवान धन्वंतरी की छवि के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया।
बांसवाड़ा आयुर्वेद विभाग उपनिदेशक डॉ. अजीत गांधी, आरोग्य मेला नोडल प्रभारी डॉ. घनश्याम भट्ट, डॉ. ओमप्रकाश शर्मा, डॉ. सुरेन्द्र जोशी, डॉ. मोहम्मद सादिक, डॉ. राकेश पण्ड्या आदि ने अतिथियों का माल्यार्पण किया तथा पगड़ी पहनाकर स्वागत किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता वाकड़े व डॉ. पीयूष जोशी ने किया। इससे पूर्व अतिथियों ने यहां आरोग्य मेले के तहत लगाई गई समस्त स्टाल्स, प्रदर्शनी और अन्य प्रभागों का अवलोकन किया। डॉ. अजीत गांधी व डॉ. राकेश पण्ड्या ने अतिथियों को मेले का अवलोकन कराते हुए संबद्ध चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जानकारी प्रदान की।  मेले का विशेष आकर्षण का केन्द्र कोटा के मनोज शर्मा द्वारा संचालित आयुर्वेद न्युरोपेथी चिकित्सा रही जहां पर दिनभर आने वाले रोगियों की भीड़ उमड़ती रही।

1700 रोगियों ने लिया लाभ: मेले के नोडल अधिकारी डॉ. घनश्याम भट्ट ने बताया कि आरोग्य मेले के तीसरे दिन कुल 1700 रोगियों की जांच, परामर्श, उपचार व औषध वितरण किया गया। इसमें आयुर्वेद के 640, न्यूरोपैथी के 430, यूनानी के 430 तथा होम्योपैथी के 280 लोगों ने लाभ प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि आरोग्य मेला 5 फरवरी तक प्रातः 11 से रात 8 बजे तक चलेगा। इसमें प्रातः 7 से 8 बजे उदयपुर प्राकृतिक चिकित्सालय की विद्या आचार्य द्वारा योग कराया जाएगा।

विविध विषयों पर हुई वार्ताएं: समारोह दौरान प्रथम सत्र में डॉ. सुभाष भट्ट ने शल्यकर्म विडियो प्रदर्शन, प्रश्नोत्तरी व उपकरणों का विसंक्रमण, आदि के बारे में जानकारी दी वहीं संभाग के प्रसिद्ध पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सतीश शर्मा द्वारा वागड़-मेवाड़ की वनौषधि, पौध विरासत, उपयोगिता, उपलब्धता व संरक्षण उपाय पर चर्चा की। मेले में उदयपुर संभाग के 142 चिकित्साधिकारियों व अन्य सदस्यों ने भाग लिया। डॉ. रश्मिा उपाध्याय, डॉ. नीलम पण्ड्या, डॉ. नीरज पण्ड्या, डॉ. देवेन्द्र मित्तल, डॉ. पूर्णब्रह्म वैष्णव, डॉ. संतोष कुमार शर्मा, डॉ. विनोद उपाध्याय, डॉ. श्रातेश जोशी, मणीलाल कटारा, सतीश कटारा, सूर्यशंकर निनामा, निर्मला पाण्डव, अमरसिंह खराड़ी, देवीलाल डामोर व पुष्पा मेहता ने सेवाएं दी।

जमीन मिली तो बांसवाड़ा में बनेगा 50 बेड का आयुर्वेद चिकित्सालय: समारोह को संबोधित करते हुए आयुर्वेद विभाग उपनिदेशक डॉ. अजीत गांधी ने कहा कि सरकार द्वारा इस अंचल में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का लाभ जनसामान्य को दिलाने के लिए तत्पर है। उन्होंने बताया कि आयुष मिशन के तहत जिले में  आयुर्वेद व उससे जुड़ी विभिन्न प्रकार की परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों से युक्त 50 बेड वाला आयुर्वेद चिकित्सालय बन सकता है बशर्ते इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित 5 बीघा जमीन उपलब्ध कराई जावे। उन्होंने इसके लिए विभाग की ओर से जिला प्रशासन को प्रस्ताव भिजवाने की भी बात कही।

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